ग्रेट निकोबार परियोजना पर अहम बैठक

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 04-07-2026
Important meeting on Great Nicobar Project
Important meeting on Great Nicobar Project

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली


 
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) डी.के. जोशी ने ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के सतत विकास की समीक्षा के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश गोयल के साथ बैठक की। यह जानकारी शनिवार को एक अधिकारी ने दी।

अधिकारी ने बताया कि गोयल और समिति के स्थायी सदस्य डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने शुक्रवार को उपराज्यपाल से मुलाकात की।
 
उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने अधिकारियों के साथ ‘पर्यावरणीय प्रभाव आकलन’ और तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना के तहत संरक्षण और विनियामक प्रारूप, द्वीपीय वन क्षेत्र का अन्य उपयोग के लिए हस्तांतरण, क्षतिपूर्ति के तहत वनीकरण और ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के आदिवासी समुदायों को विस्थापित न करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
 
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि बड़े रणनीतिक और अवसंरचना परियोजनाओं के निर्माण एवं संचालन के दौरान, ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के पर्यावरण को होने वाले नुकसान को खत्म करने, वन्यजीवों और सामाजिक-सांस्कृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए उपाय लागू किए जाने चाहिए।
 
बैठक के दौरान, उपराज्यपाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना (जिसे हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण से अंतिम पर्यावरणीय मंज़ूरी मिली है) अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री और रसद तथा परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
 
पहले चरण में, इस टर्मिनल पर लगभग 60 लाख ‘ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट’ का काम होने की उम्मीद है। इसकी अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये होगी और काम शुरू होने के तीन साल के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
 
‘ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट’ (टीईयू) जहाजरानी-बंदरागाह उद्योग में इस्तेमाल होने वाली एक माप की इकाई है और यह कंटेनर की क्षमता मापने का तरीका है।
 
बैठक में मौजूद एक और अधिकारी ने बताया कि आखिरी चरण में इसकी क्षमता बढ़कर 2.1 करोड़ टीईयू तक हो सकती है, जिससे यह न सिर्फ भारत में बल्कि शायद पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाहों में से एक बन जाएगा।