आईआईटी खड़गपुर ने डेंगू जोखिम आकलन के लिए ‘क्लाईमेड’ विकसित की

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 30-06-2026
IIT Kharagpur develops 'CliMed' for dengue risk assessment
IIT Kharagpur develops 'CliMed' for dengue risk assessment

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)खड़गपुर के अनुसंधानकर्ताओं ने भारत में डेंगू के जोखिम का आकलन करने के लिए ‘क्लाईमेड’ नाम से एक मॉडल विकसित किया है जो जलवायु की जानकारी और जगह-विशेष के आंकड़ों पर आधारित है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
 
उन्होंने कहा कि यह मॉडल रोजाना मौसम की जानकारी, जमीन के इस्तेमाल की विशेषताओं, इंसानी आबादी के आंकड़े, बसावट के हालात और मच्छरों की प्रजातियों के लिए अनुकूल माहौल जैसी जानकारियों को एक साथ लाता है, ताकि एडीज मच्छरों से फैलने वाले डेंगू के जोखिम के बारे में समझने लायक संकेत मिल सकें।
 
आईआईटी-खड़गपुर के समुद्र, नदी, वायुमंडल एवं भूमि विज्ञान केंद्र (कोरल) के प्रोफेसर एएनवी सत्यनारायण ने बताया कि डेंगू का खतरा कई मिली-जुली स्थितियों से तय होता है।
 
उन्होंने कहा कि तापमान मच्छरों के काटने, उनके विकास, जीवित रहने और मच्छर के शरीर के अंदर वायरस के फैलने लायक बनने में लगने वाले समय को प्रभावित करता है।
 
उन्होंने कहा कि यह मॉडल रोजाना मौसम की जानकारी, जमीन के इस्तेमाल की विशेषताओं, इंसानी आबादी के आंकड़े, बसावट के हालात और मच्छरों की प्रजातियों के लिए अनुकूल माहौल जैसी जानकारियों को एक साथ लाता है, ताकि एडीज मच्छरों से फैलने वाले डेंगू के जोखिम के बारे में समझने लायक संकेत मिल सकें।
 
आईआईटी-खड़गपुर के समुद्र, नदी, वायुमंडल एवं भूमि विज्ञान केंद्र (कोरल) के प्रोफेसर एएनवी सत्यनारायण ने बताया कि डेंगू का खतरा कई मिली-जुली स्थितियों से तय होता है।
 
उन्होंने कहा कि तापमान मच्छरों के काटने, उनके विकास, जीवित रहने और मच्छर के शरीर के अंदर वायरस के फैलने लायक बनने में लगने वाले समय को प्रभावित करता है।