How much leisure time children need depends on the kind of childhood we want them to have.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बार्सिलोना के एक स्कूल में खेल के समय को 30 मिनट से बढ़ाकर 40 मिनट करने के फैसले ने एक पुराने विवाद को फिर हवा दे दी है—क्या स्कूलों में अवकाश का समय बढ़ाया जाना चाहिए? कुछ शिक्षक और अभिभावक इसकी वकालत कर रहे हैं, जबकि अन्य को आशंका है कि इससे पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, संभव है कि यह सवाल ही ठीक तरह से नहीं पूछा जा रहा हो। प्राथमिक विद्यालयों में अवकाश, सीखने से अलग कोई विराम नहीं है। उदाहरण के लिए, स्पेन में कानून और शैक्षणिक दृष्टिकोण के तहत कई स्वायत्त समुदायों—कातालूनिया, वेलेंसिया, कास्टिला-ला मंचा, अंदालूसिया और ला रियोहा—में इसे शिक्षण समय का हिस्सा माना जाता है। वहीं मैड्रिड, अरागोन और कैनरी द्वीप जैसे क्षेत्रों में इसे प्रत्यक्ष शिक्षण समय नहीं माना जाता, लेकिन वहां भी अवकाश के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य है।
इस प्रकार, स्पेन के अधिकतर हिस्सों में छह से बारह वर्ष की आयु वर्ग के प्राथमिक स्तर पर खेल का समय प्रतिदिन के पांच शिक्षण घंटों का हिस्सा होता है, क्योंकि अवकाश के दौरान भी शिक्षा विशिष्ट उद्देश्यों के साथ जारी रहती है—जैसे सामाजिक व्यवहार सीखना, आत्म-नियमन, बातचीत और समझौता करना, कल्पना करना, संबंध बनाना और साथ रहना सीखना।
साथ ही, वयस्कों की प्रत्यक्ष उपस्थिति के कारण अवकाश बढ़ाने का मतलब सीखने को कम करना नहीं, बल्कि एक विशेष प्रकार के सीखने को प्राथमिकता देना है।
खेल का मैदान एक शैक्षणिक स्थल
यह बहस अक्सर केवल शारीरिक गतिविधियों की जरूरत तक सीमित रह जाती है। निस्संदेह, खासकर आज के अधिक बैठने वाले जीवन में, बच्चों के लिए शारीरिक गतिविधियां जरूरी हैं। लेकिन अवकाश केवल शारीरिक ऊर्जा निकालने का माध्यम नहीं होना चाहिए।
स्वतंत्र खेल के लिए संरचित स्थान जरूरी होते हैं—उसे नियंत्रित करने के लिए नहीं, बल्कि उसे संभव बनाने के लिए। एक शैक्षणिक खेल मैदान में छोटे बच्चों के लिए प्रतीकात्मक खेल, गेंद या रस्सी जैसे उपकरणों के साथ खेल, शांत स्थान, बातचीत के कोने, रचनात्मक गतिविधियां और शारीरिक गतिविधि के अवसर शामिल होने चाहिए।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्र और स्वतःस्फूर्त खेल का मतलब अव्यवस्थित खेल नहीं है। इसमें ऐसी व्यवस्था होती है जो स्वतंत्रता को संभव बनाती है—जैसे अलग-अलग गतिविधियों के लिए निर्धारित क्षेत्र, विभिन्न स्थानों के बीच ‘रोटेशन’ और खेलने के लिए विविध सामग्री का चयन।
जब केवल दौड़ने के लिए जगह दी जाती है, तो खेल सीमित हो जाता है और वही समस्याएं सामने आती हैं जिनकी चिंता की जाती है। लेकिन जब सामग्री, वयस्कों की उपस्थिति और संबंध बनाने के अवसर होते हैं, तो खेल का दायरा बढ़ जाता है।
संगठन ने कहा, ‘‘हमारी हालिया सिख-विरोधी रिपोर्ट बताती है कि ऐसी घटनाएं एक व्यापक और चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा हैं। सही समय पर सूचना, जन जागरुकता और संस्थानों की समन्वित कार्रवाई जरूरी है। अगर आप घृणा आधारित अपराध का शिकार हों तो पुलिस और संगठन को जरूर सूचित करें।"