भुवनेश्वर (ओडिशा)
केंद्रीय बजट 2026-27 के पेश होने से पहले ओडिशा की महिलाओं—खासतौर पर महिला उद्यमियों और पेशेवरों—ने अपनी उम्मीदें और चिंताएं खुलकर सामने रखी हैं। उनका साफ कहना है कि रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स कम होना चाहिए, ताकि आम और मध्यम वर्ग को वास्तविक राहत मिल सके।
ओडिशा की उद्यमी मैत्री ने एएनआई से बातचीत में कहा कि आज के समय में गैस बर्नर, वॉटर प्यूरिफ़ायर और एयर प्यूरिफ़ायर जैसी चीज़ें विलासिता नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुकी हैं। इसके बावजूद इन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगना आम लोगों के लिए भारी बोझ है। मैत्री ने कहा, “दो बर्नर वाला गैस चूल्हा मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार के लिए बेहद ज़रूरी है, लेकिन उस पर भी 18% जीएसटी है। वहीं, बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए एयर प्यूरिफ़ायर पर टैक्स घटाया जाना चाहिए, ताकि वह सस्ता और सुलभ हो सके।”
मैत्री ने आयकर व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की। उनका कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी इनकम टैक्स स्लैब को नए सिरे से परिभाषित किया जाना चाहिए, ताकि टैक्स का दायरा व्यापक हो और करदाताओं को वास्तविक लाभ मिले। उन्होंने विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए टैक्स में छूट की मांग की। “अगर महिलाओं द्वारा संचालित और महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों को टैक्स-फ्री किया जाए, तो इससे ज़्यादा महिलाएं कारोबार में आएंगी और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे,” उन्होंने कहा।
मैत्री ने हवाई यात्रा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हवाई किरायों में कोई स्थिरता नहीं है और थोड़ी सी परेशानी या उड़ानों के रद्द होने पर किराया कई गुना बढ़ जाता है। “हवाई किराए पर एक सीमा तय होनी चाहिए। जीएसटी या अन्य टैक्स घटाए जाने चाहिए, ताकि आम यात्रियों को राहत मिले,” उन्होंने कहा।
वहीं, सॉफ्टवेयर इंजीनियर अन्वेषा ने ज़रूरी सेवाओं पर टैक्स के बोझ को लेकर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अस्पतालों, सामाजिक आयोजनों, बाहर खाने, रेलवे टिकट और अन्य सेवाओं पर लगातार जीएसटी चुका रहा है, लेकिन उसके बदले पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। “हम बहुत टैक्स देते हैं, लेकिन सुविधाएं वैसी नहीं हैं, जैसी होनी चाहिए,” उन्होंने कहा।
अन्वेषा ने निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और मध्यम वर्ग की समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी ज़िंदगी बचत पर निर्भर होती है। “निजी नौकरी में हम सिर्फ़ अपनी सैलरी से खाना और घर चला पाते हैं। इससे आगे सोच पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में टैक्सपेयर्स को ज़्यादा सुविधाएं मिलनी चाहिए,” उन्होंने ज़ोर देकर कहा।
गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में भारत का नौवां लगातार केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। इस दौरान वह वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार की अनुमानित आय और व्यय का विवरण प्रस्तुत करेंगी। साथ ही, भारत सरकार की ओर से राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के तहत मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति और मैक्रो-आर्थिक ढांचे से जुड़े अहम दस्तावेज भी सदन के पटल पर रखे जाएंगे।
ओडिशा की महिलाओं की ये उम्मीदें इस बात का संकेत हैं कि बजट से सिर्फ़ बड़े सुधारों ही नहीं, बल्कि आम ज़िंदगी से जुड़ी छोटी लेकिन अहम राहतों की भी अपेक्षा की जा रही है।




