बजट 2026: डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर लगाम, F&O पर STT बढ़ाकर सरकार का बड़ा कदम

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 01-02-2026
Budget 2026: Government takes major step by curbing derivative trading and increasing STT on F&O.
Budget 2026: Government takes major step by curbing derivative trading and increasing STT on F&O.

 

नई दिल्ली 

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने डेरिवेटिव बाज़ार में बढ़ती सट्टेबाज़ी को हतोत्साहित करने के लिए कड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम को रिटेल निवेशकों को हो रहे भारी नुकसान और बाजार में अनावश्यक जोखिम को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि फ्यूचर्स ट्रेड पर STT को मौजूदा 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जा रहा है। वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शंस के एक्सरसाइज़—दोनों पर STT को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। अभी तक यह दरें क्रमशः 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत थीं। वित्त मंत्री ने साफ किया कि इस बदलाव का मकसद राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अत्यधिक डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर नियंत्रण करना है।

इसके अलावा सरकार ने शेयर बायबैक टैक्स व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। अब सभी प्रकार के शेयरधारकों के लिए बायबैक को कैपिटल गेन के रूप में टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। हालांकि, टैक्स आर्बिट्राज के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगाया जाएगा। इससे कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए प्रभावी टैक्स दर 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए 30 प्रतिशत हो जाएगी।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि F&O पर STT में यह बढ़ोतरी ट्रेडिंग लागत को काफी बढ़ा देगी। कोटक सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ श्रिपाल शाह के अनुसार, “STT में तेज़ बढ़ोतरी से डेरिवेटिव ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी, जिससे वॉल्यूम में कमी आ सकती है। सरकार का उद्देश्य वॉल्यूम को नियंत्रित करना है, न कि टैक्स से अधिक कमाई करना।”

दरअसल, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को हो रहे नुकसान को लेकर सेबी और सरकार लंबे समय से चिंतित हैं। सेबी के एक अध्ययन में सामने आया था कि लगभग 93 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडर्स—यानी हर 10 में से 9—F&O ट्रेडिंग में लगातार नुकसान उठा रहे हैं। हैरानी की बात यह भी है कि नुकसान के बावजूद 75 प्रतिशत से अधिक ट्रेडर्स इस सेगमेंट में ट्रेडिंग जारी रखते हैं।

हाल के वर्षों में सेबी ने जोखिम कम करने के लिए न्यूनतम कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए हैं। सरकार का यह नया फैसला उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हालांकि डेरिवेटिव बाज़ार कीमतों की खोज, तरलता और जोखिम प्रबंधन में मदद करता है, लेकिन अत्यधिक सट्टेबाज़ी इसके मूल उद्देश्य से भटका देती है।

कुल मिलाकर, बजट 2026 का यह फैसला डेरिवेटिव ट्रेडिंग को लेकर सरकार के सख्त रुख को दर्शाता है। इससे एक ओर जहां छोटे निवेशकों को अनावश्यक जोखिम से बचाने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर बाज़ार में ज़िम्मेदार और संतुलित निवेश व्यवहार को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया है।