शिक्षण संस्थानों के नियमन पर याचिका की सुनवाई 11 मई को संभव

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-05-2026
Hearing on the petition on regulation of educational institutions is likely on May 11.
Hearing on the petition on regulation of educational institutions is likely on May 11.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
उच्चतम न्यायालय 11 मई को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा, जिसमें 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा या धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों को विनियमित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
 
न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की इस याचिका की सुनवाई कर सकती है।
 
अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि “14 वर्ष तक के बच्चों को धर्मनिरपेक्ष शिक्षा और/या धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों को अनुच्छेद 21A के साथ-साथ अनुच्छेद 39(एफ), 45 और 51-ए(के) के तहत पंजीकृत, मान्यता प्राप्त, पर्यवेक्षित और निगरानी में रखा जाए।”
 
याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 30 में अल्पसंख्यकों को अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत मिले अधिकार से अलग कोई विशेष या अतिरिक्त अधिकार नहीं है।
 
याचिका में कहा गया: “अनुच्छेद 30 में स्पष्ट किया जाए कि यह अनुच्छेद 19(1)(जी) का विशेष पुनः उल्लेख है और इस अनुच्छेद में 19(1)(जी) के तहत नागरिकों को दिए गए अधिकारों/लाभों/विशेषाधिकारों के अलावा कोई अधिकार नहीं है।”
 
याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ता अनुच्छेद 32 के तहत यह जनहित याचिका दायर करके अनुरोध करता है कि 14 वर्ष तक के बच्चों को धर्मनिरपेक्ष/धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों के पंजीकरण, मान्यता, पर्यवेक्षण और निगरानी के निर्देश दिए जाएं, जो अनुच्छेद 21ए, 39(एफ), 45 और 51-ए(के) की भावना के अनुरूप हों।”
 
याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ता का मानना है कि बच्चे राष्ट्र के विकास की रीढ़ हैं और उनकी उम्र कम होने के कारण वे भोले होते हैं और आसानी से विश्वास कर लेते हैं। इसलिए सरकार पर उनकी विशेष जिम्मेदारी होती है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, क्योंकि छोटे बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें गैर पंजीकृत संस्थानों में धोखा दिया जा सकता है।”