आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली सरकार लॉजिस्टिक व भंडारण गृह नीति के तहत कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित योजना और डिजिटल माल-परिवहन प्रबंधन प्रणाली लागू करेगी। इससे माल ढुलाई की योजना, मार्ग का बेहतर निर्धारण और सामान पहुंचाने का समय तय करना अधिक सटीक एवं प्रभावी होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने एक बयान में बुधवार को यह जानकारी दी।
बयान के मुताबिक, दिल्ली सरकार लॉजिस्टिक व भंडारण गृह नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जो राजधानी में माल ढुलाई व आपूर्ति प्रणाली को अधिक कुशल, तेज और कम लागत वाला बनाने के साथ-साथ कारोबार सुगमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह नीति दिल्ली के लॉजिस्टिक क्षेत्र में व्यापक सुधार लाएगी जिससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, उद्योगों को गति मिलेगी, रोजगार बढ़ेगा और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा, “ यह नीति दिल्ली की लॉजिस्टिक दक्षता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत करेगी और राज्यों की ‘लॉजिस्टिक प्रदर्शन’ मापने वाली एलईएडीएस (लीड्स) रैंकिंग में सुधार लाने में सहायक होगी। बेहतर अवसंरचना, पारदर्शी प्रक्रियाओं और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को नई गति मिलेगी, जिससे निवेशकों के लिए दिल्ली अधिक आकर्षक गंतव्य बनेगी।”
उन्होंने कहा कि नीति के तहत एआई आधारित योजना, वास्ताविक समय पर निगरानी और डिजिटल माल-परिवहन प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी जिससे माल ढुलाई की योजना बनाने, मार्ग का बेहतर निर्धारण और सामान पहुंचाने का समय तय करना अधिक सटीक एवं प्रभावी होगा, जिससे खर्च कम होगा और समय की बचत होगी।
गुप्ता ने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में माल परिवहन से होने वाली भीड़भाड़ को कम करना, प्रदूषण घटाना और राजधानी को एक आधुनिक, कुशल और पर्यावरण अनुकूल लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) का आधुनिकीकरण किया जाएगा तथा लॉजिस्टिक गलियारे, ट्रक टर्मिनल और पार्किंग हब विकसित किए जाएंगे और मंडियों के पास शीत भंडार गृह बनाए जाएंगे, जिससे भंडारण और परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और शहर के भीतर यातायात दबाव कम होगा।