आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था में शीर्ष पद पर रह चुकीं सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि जलवायु कार्रवाई के केंद्र में स्वास्थ्य को रखने से लोगों, सरकारों एवं स्थानीय निकायों के लिए व्यावहारिक कदम उठाना आसान हो जाता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की क्षति और प्रदूषण से मानव एवं पारिस्थितिकी स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचता है तथा मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा होता है।
संयुक्त राष्ट्र की एशिया-प्रशांत समन्वय रिपोर्ट की सह-लेखिका स्वामीनाथन ने ‘पीटीआई वीडियो’ से इस बारे में कहा कि भीषण गर्मी, जलजनित और मच्छर जनित बीमारियां, विस्थापन, लैंगिक हिंसा में वृद्धि तथा पोषण पर पड़ने वाला असर सबसे पहले स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में देशों को सुझाए गए कदमों के केंद्र में स्वास्थ्य को रखा गया है।
संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) ने मंगलवार को यह रिपोर्ट जारी की। इसमें इस बात का अध्ययन किया गया है कि भारत और चीन जैसे देश स्वास्थ्य केंद्रित उपायों के जरिये जलवायु, जैव विविधता और सतत विकास संबंधी लक्ष्यों को एक साथ कैसे आगे बढ़ा रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘यदि भीषण गर्मी का उदाहरण लें तो हम इसे केवल भारत या विकासशील देशों में ही नहीं, बल्कि उच्च आय वाले देशों समेत पूरी दुनिया में देख रहे हैं और इससे कौन पीड़ित हो रहा है? फिर से वही लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं जो सबसे कमजोर हैं... वे लोग जिनकी आजीविका और आमदनी पहले से ही बहुत अस्थिर है।’’