गांधीनगर
Gujarat विधानसभा ने बहुमत से समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पारित कर दिया है। इसके साथ ही गुजरात, Uttarakhand के बाद इस कानून को लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री Bhupendra Patel ने इसे “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समानता और न्याय सुनिश्चित करेगा।
इस बिल के तहत विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन संबंधों से जुड़े नियमों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया है। अब सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जबरन, धोखाधड़ी या दबाव में किए गए विवाहों पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
तलाक के मामलों में भी अदालत की मंजूरी जरूरी होगी। बिना कानूनी प्रक्रिया के तलाक को अवैध माना जाएगा और इसके लिए 3 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही महिलाओं को बिना किसी शर्त के दोबारा विवाह करने का अधिकार दिया गया है, जिससे उनकी सुरक्षा और अधिकारों को मजबूती मिलेगी।
इस कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण न कराने पर 3 महीने तक की सजा या 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि संबंध में शामिल व्यक्ति 18 से 21 वर्ष की आयु के हैं, तो उनके अभिभावकों को इसकी सूचना दी जाएगी। नाबालिगों से जुड़े मामलों में सख्त प्रावधान लागू होंगे।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह कानून महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करेगा। इससे महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और बच्चों को पहचान, पालन-पोषण और विरासत के अधिकार सुनिश्चित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस बिल को तैयार करने से पहले विभिन्न देशों के कानूनों का अध्ययन किया गया और जनता की राय भी ली गई।
इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश Justice Ranjana Prakash Desai की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी, जिसने विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी।
उपमुख्यमंत्री Harsh Sanghavi ने कहा कि यह बिल इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं।
गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है, जिसका उद्देश्य सामाजिक समानता और न्याय सुनिश्चित करना है।