Green hydrogen, ammonia prices signal India moving towards global competitiveness: Pralhad Joshi
नई दिल्ली
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को कहा कि ग्रीन अमोनिया और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए मिली प्रतिस्पर्धी कीमतें यह बताती हैं कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर ग्लोबल स्तर पर मुकाबला करने की स्थिति में आ रहा है। ग्रीन अमोनिया के लिए सबसे कम बोली 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए 279 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
जोशी ने S&P ग्लोबल एनर्जी के 'होरिजन्स क्लीन एनर्जी एक्सपेंशन इंडिया 2026' कॉन्फ्रेंस में एक वीडियो मैसेज में कहा, "ग्रीन अमोनिया के लिए सबसे कम बोली 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं, ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत 279 रुपये प्रति किलोग्राम तय हुई। ये कीमतें दिखाती हैं कि भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन ग्लोबल स्तर पर लागत के मामले में प्रतिस्पर्धी बनने की ओर बढ़ रहा है।"
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत हुई प्रगति का ज़िक्र करते हुए जोशी ने बताया कि सालाना लगभग 8.62 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और सालाना 3,000 MW घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए इंसेंटिव दिए गए हैं। उन्होंने कहा, "19,744 करोड़ रुपये के बजट वाले नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत सालाना लगभग 8.62 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और सालाना 3,000 MW घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंसेंटिव दिए गए हैं।"
इस मिशन का मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, इस्तेमाल और एक्सपोर्ट के लिए एक ग्लोबल हब बनाना है। जोशी ने कहा कि भारत के ग्रीन हाइड्रोजन अभियान को देश के बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा आधार और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बनाने की कोशिशों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि भारत की नॉन-फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन के बिना) आधारित बिजली क्षमता 304 GW को पार कर गई है, जबकि सोलर क्षमता 160 GW से ज़्यादा हो गई है। जोशी ने आगे कहा, "साथ ही, भारत तेज़ी से अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं भी बढ़ा रहा है और कुल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता लगभग 414 GW है।"
मंत्री ने कहा कि सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के लिए घरेलू मांग पैदा करने पर भी काम कर रही है, खासकर उन सेक्टर में जो अभी भी काफी हद तक फॉसिल फ्यूल पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा, "शायद हम अपनी रिफाइनरियों में भी मांग पैदा कर रहे हैं। रिफाइनरियों के लिए 30 kTPA की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है।" जोशी ने कहा कि इस कदम से ग्रीन हाइड्रोजन के लिए घरेलू बाज़ार बनाने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार स्टील और हाइड्रोजन-आधारित मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग सुविधाओं को भी बढ़ावा दे रही है, जबकि पहले कमर्शियल प्रोजेक्ट्स भी आकार लेने लगे हैं। हालांकि, जोशी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जैसे-जैसे ग्रीन हाइड्रोजन का बाज़ार बढ़ेगा, स्टेकहोल्डर्स के बीच भरोसा बनाना ज़रूरी होगा। उन्होंने कहा, "लेकिन इस बाज़ार के विस्तार के लिए भरोसा बहुत ज़रूरी है।" पारदर्शिता को मज़बूत करने के लिए, भारत ने देश में उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन को सर्टिफ़ाई करने के लिए एक फ़्रेमवर्क बनाने के मकसद से 'ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफ़िकेशन स्कीम' शुरू की है।
जोशी ने कहा, "इसीलिए हमने 'इंडिया ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफ़िकेशन ऑर्डर' शुरू किया है ताकि भारत में उत्पादित हर प्लांट को पारदर्शी तरीके से सर्टिफ़ाई किया जा सके।"
हाइड्रोजन से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को औद्योगिक हकीकत में बदलने के सम्मेलन के विषय का ज़िक्र करते हुए, मंत्री ने कहा कि नीति-निर्माताओं, इंडस्ट्री, निवेशकों और वैश्विक साझेदारों को एक साथ लाने वाले प्लेटफ़ॉर्म इस उभरते बाज़ार के लिए ज़रूरी जानकारी और भरोसा बनाने में मदद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, "एक नए बाज़ार को अच्छी जानकारी, पारदर्शिता और भरोसे की ज़रूरत होती है। यह प्लेटफ़ॉर्म उस इकोसिस्टम को बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।"
जोशी ने कहा कि जैसे-जैसे यह क्षेत्र विकसित होगा, सरकार रुकावटों को दूर करने और एक स्थिर और अनुमान लगाने योग्य नीतिगत माहौल बनाए रखने के लिए इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करती रहेगी। उन्होंने कहा, "हम यहां जो कुछ भी बनाएंगे, उससे न केवल भारत को, बल्कि दुनिया भर में हमारे साझेदारों को भी मदद मिलेगी।"