Supreme Court dismisses Danam Nagender's plea against disqualification as Telangana MLA
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना के अयोग्य घोषित विधायक दानम नागेंद्र की याचिका खारिज कर दी। नागेंद्र ने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें पार्टी बदलने के मामले में विधानसभा सदस्य (MLA) के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था और उनकी विधानसभा सीट को खाली घोषित कर दिया गया था। यह कानूनी झटका तेलंगाना हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच द्वारा शुक्रवार को खैराताबाद के विधायक दानम नागेंद्र को अयोग्य घोषित करने और उनकी विधानसभा सीट को खाली घोषित करने के कारण लगा।
नागेंद्र 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनावों में BRS के टिकट पर खैराताबाद से चुने गए थे। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और 2024 का लोकसभा चुनाव सिकंदराबाद से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा। हालांकि वे संसदीय चुनाव हार गए, लेकिन वे खैराताबाद के विधायक बने रहे। उनकी अयोग्यता की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में कहा गया था कि कांग्रेस में शामिल होने का उनका फैसला BRS की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने जैसा है और इस पर संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे आमतौर पर दलबदल विरोधी कानून कहा जाता है) के प्रावधान लागू होते हैं।
तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष ने पहले नागेंद्र को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, जिससे इस मुद्दे पर लंबी कानूनी लड़ाई चली। इसके बाद तेलंगाना हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने अध्यक्ष के फैसले को रद्द कर दिया और नागेंद्र को विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि खैराताबाद विधानसभा क्षेत्र खाली हो गया है और वहां नए सिरे से चुनाव कराने होंगे। कोर्ट ने नागेंद्र की अयोग्यता के लिए 23 अप्रैल, 2024 की तारीख तय की है।
विधायक दानम नागेंद्र की अयोग्यता पर तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए, BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने मांग की कि जो विधायक BRS छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए और जनता से नया जनादेश लेना चाहिए। KTR ने कहा कि राज्य सरकार को BRS छोड़कर जाने वाले विधायकों से जुड़े बाकी सभी मामलों में भी यही सिद्धांत लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा, "सरकार को MLA की अयोग्यता पर हाई कोर्ट के फ़ैसले पर ध्यान देना चाहिए और यही सिद्धांत पार्टी बदलने वाले बाकी MLA पर भी लागू करना चाहिए। BRS छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले हर MLA को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए और जनता के फ़ैसले का सामना करना चाहिए।"