आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की दो साल पहले एक मित्र के घर पर कांग्रेस नेता शशि थरूर की किताब ‘अ वंडरलैंड ऑफ वर्ड्स’ पर नजर पड़ी और उसी क्षण उन्हें अपनी नई किताब लिखने का विचार आया- जो अब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’’ के रूप में दुनिया के सामने आने वाली है।
जनरल नरवणे की यह पुस्तक भारतीय सशस्त्र बलों के ‘‘अनदेखे, विचित्र और बेहद मनोरंजक पहलुओं’’ की जीवंत पड़ताल करती है।
जनरल नरवणे अपने अप्रकाशित विवादास्पद संस्मरण ‘‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’’ को लेकर हाल में खबरों में रहे थे।
उन्होंने अपनी पुस्तक ‘‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’’ में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना से जुड़ी किंवदंतियों और रहस्यों के कुछ बेहद रोचक पहलुओं का उल्लेख किया है।
पुस्तक की प्रस्तावना में उन्होंने लिखा कि किस तरह वह थरूर की पुस्तक से प्रभावित हुए थे, जो अंग्रेजी भाषा की विशिष्टताओं पर केंद्रित निबंधों का संग्रह है।
दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक 28वें सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं देने वाले जनरल नरवणे ने कहा, ‘‘यदि अंग्रेजी भाषा की विचित्रताओं और विशिष्टताओं पर इतनी रोचक पुस्तक लिखी जा सकती है, तो भारतीय सेना पर भी ऐसी ही एक किताब क्यों नहीं हो सकती।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘इस विचार का बीज मेरे मन में उसी दिन पड़ गया था जब मैंने उस किताब को देखा था, लेकिन मैंने इस पर गंभीरता से सोचना 2025 के मध्य में शुरू किया…।’’