नई दिल्ली
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि भारत को जल्द से जल्द 100 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ गई है, इसलिए देश के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी हो गया है।
गडकरी ने कहा कि भारत वर्तमान में अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिससे देश पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात किया जाता है, जिससे न केवल विदेशी मुद्रा खर्च बढ़ता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी गंभीर रूप ले रहा है।
उन्होंने इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी द्वारा आयोजित हरित परिवहन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वैकल्पिक ईंधन और जैव ईंधन के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। उनका मानना है कि एथनॉल मिश्रण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गडकरी ने बताया कि वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की शुरुआत की थी, और अब कई वाहन मामूली तकनीकी बदलाव के साथ इस ईंधन पर चल सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राजील जैसे देश पहले ही 100 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं और भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के महत्व पर भी जोर दिया। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे होते हैं जो पेट्रोल या डीजल के साथ-साथ एथनॉल या मेथनॉल मिश्रण पर भी चल सकते हैं। इससे ईंधन विकल्पों में लचीलापन आता है और आयात पर निर्भरता कम होती है।
मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर नए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE-3) मानकों का अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह संकेत है कि सरकार स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा वाहनों को बढ़ावा दे रही है।
गडकरी ने हरित हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताते हुए कहा कि इसके उत्पादन, भंडारण और परिवहन की लागत को कम करना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि हाइड्रोजन की लागत को लगभग एक डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाना होगा, तभी भारत ऊर्जा निर्यातक देश बन सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोल और डीजल वाहनों के उपयोग को धीरे-धीरे कम करना जरूरी है, लेकिन लोगों पर किसी तरह की जबरदस्ती नहीं की जाएगी। उपभोक्ता की पसंद को ध्यान में रखते हुए ही बदलाव किए जाएंगे।
अंत में उन्होंने ऑटोमोबाइल कंपनियों से अपील की कि वे केवल लागत पर ध्यान देने के बजाय गुणवत्ता और नवाचार पर जोर दें, ताकि भारतीय वाहन उद्योग वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।