नई दिल्ली
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को मंत्रालय के तहत आने वाली सभी खनन और अन्वेषण एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे लंबित परियोजनाओं में तेज़ी लाएं और एक 'मिशन-मोड' दृष्टिकोण अपनाएं, जिसका उद्देश्य भारत की खनिज सुरक्षा को मज़बूत करना और उसके दीर्घकालिक रणनीतिक विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है। बेंगलुरु में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), भारतीय खान ब्यूरो (IBM), राष्ट्रीय रॉक यांत्रिकी संस्थान (NIRM) और रिमोट सेंसिंग व एरियल सर्वेक्षण (RSAS) प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठकों की एक श्रृंखला की अध्यक्षता करते हुए, मंत्री ने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में चल रहे अन्वेषण कार्यों, तकनीकी उन्नयन और परियोजना निष्पादन की समय-सीमाओं की समीक्षा की।
इन बैठकों का मुख्य ज़ोर रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण में तेज़ी लाने पर था, जैसे कि दुर्लभ मृदा तत्व (REE), लिथियम, निकिल, कोबाल्ट, टंगस्टन, वैनेडियम और प्लैटिनम समूह के तत्व; जिन्हें भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। तत्परता और जवाबदेही पर ज़ोर देते हुए, रेड्डी ने कहा कि सभी एजेंसियों को अब 'परिणाम-उन्मुख' कार्यप्रणाली की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, "सभी संगठनों को अपनी लंबित परियोजनाओं में तेज़ी लानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और दक्षता ही हर संस्थागत प्रक्रिया की नींव बनें। भारत की जनता और भारत सरकार, इस क्षेत्र में कार्यरत प्रत्येक एजेंसी से गति, जवाबदेही और स्पष्ट परिणामों की अपेक्षा रखती है।"
व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य को रेखांकित करते हुए, उन्होंने आगे कहा: "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और दूरदृष्टि के तहत, भारत एक आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। भारत के भविष्य के विकास, औद्योगिक विस्तार और रणनीतिक खनिज सुरक्षा को सुनिश्चित करने में खनन और अन्वेषण क्षेत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।" मंत्री ने निर्धारित समय-सीमाओं और मापने योग्य परिणामों के साथ समन्वित निष्पादन की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया; साथ ही इस बात पर बल दिया कि अन्वेषण एजेंसियों को 'मिशन-मोड' में कार्य करना चाहिए, ताकि खनिजों की खोज और विकास कार्यों में होने वाली देरी को कम किया जा सके और दक्षता में सुधार लाया जा सके।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने कर्नाटक और गोवा में प्राप्त महत्वपूर्ण निष्कर्षों के संबंध में अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की, जिसमें सोना, तांबा, निकिल और कोबाल्ट के संभावित भंडार शामिल थे। इसके साथ ही, GSI ने अपना पंचवर्षीय रोडमैप भी प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत लगभग 48,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मानचित्रण और AI-सक्षम अन्वेषण कार्य किए जाने की योजना है। राष्ट्रीय रॉक यांत्रिकी संस्थान (NIRM) ने बुनियादी ढांचा और खनन सुरक्षा परियोजनाओं को सहयोग प्रदान करने में अपनी भूमिका को प्रदर्शित किया—जिनमें सुरंग निर्माण, मेट्रो रेल, जलविद्युत और भूकंपीय निगरानी प्रणालियां शामिल हैं। वहीं, भारतीय खान ब्यूरो (IBM) ने विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों के तहत सतत खनन, वैज्ञानिक तरीके से खानों को बंद करने (Mine Closure) और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति से संबंधित अपनी पहलों को रेखांकित किया। RSAS डिवीज़न ने 'नेशनल एयरो-जियोफिज़िकल मैपिंग प्रोग्राम' के तहत हुई प्रगति की भी जानकारी दी। इस प्रोग्राम के तहत, हाइपरस्पेक्ट्रल और एयरबोर्न जियोफिज़िकल सर्वे का इस्तेमाल करके 6.5 लाख वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा के क्षेत्र को कवर किया गया है, जिससे 200 से ज़्यादा अन्वेषण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।