अनिल अंबानी समूह केस में पूर्व अधिकारी ईडी हिरासत में भेजे गए

Story by  रावी | Published by  [email protected] | Date 17-04-2026
Former Official Sent to ED Custody in Anil Ambani Group Case
Former Official Sent to ED Custody in Anil Ambani Group Case

 

नई दिल्ली।

कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और धनशोधन से जुड़े बड़े मामले में दिल्ली की एक अदालत ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह (RAAG) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को पांच दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ED) हिरासत में भेज दिया है। यह फैसला जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए प्रारंभिक साक्ष्यों और गंभीर आरोपों के आधार पर लिया गया है।

अदालत के 24 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा गया है कि ईडी की जांच में यह सामने आया है कि बैंकों से लिए गए ऋण की बड़ी राशि को कथित तौर पर उन शेल (मुखौटा) कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिन पर समूह का ही नियंत्रण था। यह आरोप वित्तीय अनियमितताओं और फंड डायवर्जन के गंभीर संकेत देता है।

ईडी ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान उसे ईमेल और अन्य डिजिटल माध्यमों से महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया गया है कि आरोपियों की भूमिका करोड़ों रुपये के कर्ज की हेराफेरी में स्पष्ट रूप से सामने आती है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय लेन-देन था, जिसके जरिए बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग किया गया।

यह मामला विशेष रूप से Reliance Home Finance Limited और Reliance Commercial Finance Limited से जुड़े कथित ऋण घोटाले से संबंधित है। आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से प्राप्त कर्ज को गलत तरीके से अन्य कंपनियों में स्थानांतरित किया गया, जिससे बैंकिंग नियमों का उल्लंघन हुआ।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों से पूछताछ के लिए ईडी की हिरासत आवश्यक है, ताकि पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका का पता लगाया जा सके। अदालत ने माना कि इस स्तर पर जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों का ईडी के पास रहना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों को एक बार फिर सामने लाता है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।

इस घटनाक्रम पर अभी रिलायंस अनिल अंबानी समूह की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया जारी है और आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल, ईडी इस मामले में गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नए तथ्यों के सामने आने की उम्मीद है। यह मामला न केवल वित्तीय अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि कॉर्पोरेट प्रशासन में पारदर्शिता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।