आईओए पूर्व अध्यक्ष एन रामचंद्रन का निधन, खेल जगत शोक में

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-04-2026
Former IOA President N. Ramachandran Passes Away; Sports World Mourns
Former IOA President N. Ramachandran Passes Away; Sports World Mourns

 

नई दिल्ली।

भारतीय खेल जगत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के पूर्व अध्यक्ष N Ramachandran का गुरुवार को चेन्नई में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। उनके निधन से देश के खेल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है और कई दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

सूत्रों के अनुसार, रामचंद्रन पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज जारी था। भारतीय स्क्वाश रैकेट्स महासंघ के महासचिव Cyrus Poncha ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा कि यह स्क्वाश और भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मेरे पास शब्द नहीं हैं… उन्होंने खेलों के विकास में असाधारण योगदान दिया।”

एन रामचंद्रन का खेल प्रशासन में लंबा और प्रभावशाली करियर रहा। उन्होंने फरवरी 2014 से दिसंबर 2017 तक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और इस दौरान भारतीय खेलों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में भारतीय ओलंपिक संघ ने कई अहम फैसले लिए, जिससे खेल प्रशासन को मजबूती मिली।

इसके अलावा, वह 2008 से 2016 तक विश्व स्क्वाश महासंघ के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्क्वाश खेल को बढ़ावा देने और उसकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कई पहल कीं। भारत में भी स्क्वाश के विकास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके प्रयासों के चलते देश में इस खेल को नई पहचान मिली और कई युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिला।

रामचंद्रन को एक दूरदर्शी प्रशासक के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने खेलों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे एक मजबूत संस्थागत ढांचे के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया। उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता, प्रतिबद्धता और खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता देने का स्पष्ट दृष्टिकोण झलकता था।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि एन रामचंद्रन का योगदान केवल उनके पदों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारतीय खेल संस्कृति को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई नीतिगत बदलाव हुए, जिनका असर आज भी भारतीय खेल प्रणाली में देखा जा सकता है।

उनके निधन के साथ भारतीय खेल प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि, उनके द्वारा किए गए कार्य और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

देशभर के खिलाड़ियों, अधिकारियों और खेल प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद किया है। एन रामचंद्रन भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन भारतीय खेल जगत में उनका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।