तिरुवनंतपुरम (केरल)
केरल के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री वीडी सतीसन ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए UDF सरकार का पहला राज्य बजट पेश किया। इसमें स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार, रोज़गार पैदा करने, सामाजिक कल्याण और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास के ज़रिए "नए दौर का केरल" बनाने का पांच साल का रोडमैप बताया गया है। सतीसन ने कहा, "UDF सरकार का यह संशोधित बजट अगले पांच वर्षों में राज्य में लागू होने वाली कल्याणकारी योजनाओं के लिए रोडमैप का काम करेगा। UDF सरकार स्पष्ट और निर्णायक जन-जनादेश के साथ सत्ता में आई है।"
उन्होंने कहा कि यह बजट सुधारों, तकनीक और सामाजिक व भौतिक बुनियादी ढांचे में निवेश के ज़रिए इन चुनौतियों से निपटने के UDF सरकार के विज़न को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "सरकार आधुनिक तकनीकी संभावनाओं का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करके स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को बेहतर बनाने, रोज़गार के ज़्यादा अवसर पैदा करने, वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास को एकीकृत करने वाली पहल करके 'नए दौर का केरल' बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने कहा कि इतने वर्षों में सामाजिक विकास में केरल की उपलब्धियों के बावजूद सरकार को कई प्रमुख क्षेत्रों में चुनौतियां विरासत में मिली हैं।
उन्होंने कहा, "सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों को वैश्विक पहचान मिली है, लेकिन हाल ही में उन्हें गंभीर चुनौतियों और दबावों का सामना करना पड़ रहा है। केरल के सामाजिक विकास के संकेतक कई वर्षों से स्थिर बने हुए हैं। युवाओं में बेरोज़गारी चिंता का विषय बनी हुई है।" सतीसन ने वित्तीय बाधाओं के बावजूद UDF सरकार द्वारा पहले ही उठाए गए कल्याणकारी कदमों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, "राज्य के सामने गंभीर वित्तीय चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने 'छह इंदिरा गारंटी' के तहत प्रमुख वादों को पहले ही लागू कर दिया है, जिसमें KSRTC बसों में महिलाओं के लिए मुफ़्त यात्रा और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अलग विभाग बनाना शामिल है। आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायकों और शिक्षकों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में निवेश को मज़बूत करके, सरकार केरल को एक प्रमुख डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करना चाहती है।"
मुख्यमंत्री ने राज्य की बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया और राज्य के भीतर युवाओं के लिए अवसर पैदा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। सथीसन ने कहा, "राज्य की आबादी की बनावट में बड़े बदलाव आए हैं। युवाओं की संख्या, जो राज्य की डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) हैं, घट रही है, जबकि कई लोग नौकरी की तलाश में विदेश जा रहे हैं। आबादी में हो रहे इन बदलावों पर एक विस्तृत अध्ययन ज़रूरी है। हमें अच्छी शिक्षा और रोज़गार के मौके देने होंगे ताकि हमारे युवा केरल के विकास में भागीदार बन सकें।"
सामाजिक और आर्थिक बदलावों के साथ तालमेल बिठाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बुज़ुर्गों के कल्याण पर ध्यान देगी और साथ ही आर्थिक विकास के नए रास्ते भी तलाशेगी। उन्होंने आगे कहा, "बुज़ुर्गों के लिए बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित करने के साथ-साथ, हमें उनकी क्षमताओं का भी सही इस्तेमाल करना चाहिए और एक 'सिल्वर इकॉनमी' (बुज़ुर्गों पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) बनानी चाहिए। केरल की आर्थिक मुश्किलों और ढाँचागत बदलावों को सिर्फ़ पारंपरिक तरीकों से हल नहीं किया जा सकता। सरकार आधुनिक और नए तरीकों से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने, सरकारी खजाने के लिए संसाधन जुटाने और धन का समान बँटवारा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"