कभी वामपंथ के गढ़ रहे कटवा में चुनावी चर्चाओं में किसानों की समस्याएं व युवाओं की आकांक्षाएं हावी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 27-04-2026
Farmers' problems and youth's aspirations dominate election debates in Katwa
Farmers' problems and youth's aspirations dominate election debates in Katwa

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
पश्चिम बंगाल के पूर्व वर्धमान जिले के कटवा क्षेत्र पर इस विधानसभा चुनाव में सभी की नजरें हैं, जहां मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच माना जा रहा है। इस सीट पर किसानों की समस्याएं और युवाओं की आकांक्षाएं चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं।
 
कटवा एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है और यह पूर्व वर्धमान लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यहां लगभग 65.40 प्रतिशत मतदाता गांवों में और 34.60 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। सामाजिक रूप से यह क्षेत्र मिश्रित है, जहां अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी करीब 27.41 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी लगभग 21.80 प्रतिशत है।
 
ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र वामपंथ का गढ़ रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने यहां दो बार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने छह बार जीत दर्ज की। कांग्रेस का भी यहां मजबूत प्रभाव रहा, खासकर वरिष्ठ नेता रवीन्द्रनाथ चटर्जी के नेतृत्व में, जिन्होंने 1996 में जीत हासिल की और फिर लगातार कई चुनाव जीते।
 
बाद में चटर्जी 2016 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और 2016 व 2021 के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।