आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
संभव है कि गर्मियों के महीनों में आपको अपने आस-पास फुटपाथ पर मरे हुए भौंरे (बम्बलबीज) दिखाई दें।
इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें कुछ मौसमी और काफी हद तक इंसानी गतिविधियां हैं।
भौंरे सामाजिक होते हैं और कॉलोनियों में रहते हैं। इन कॉलोनियों को बहुत सक्रिय मजदूर भौंरें चलाते हैं, जिनकी उम्र बहुत छोटी यानी चार से छह हफ्ते की होती है।
इसका अभिप्राय है कि काफ़ी कम समय में ही बूढ़े होकर ये भौंरें मर जाते हैं और कॉलोनी में बीमारी फैलने से रोकने के लिए, स्वस्थ युवा मजदूर भौंरे मरे हुए भौंरों को बाहर निकालकर कॉलोनी से काफ़ी दूर ले जाते हैं।
एक और वजह मौसम है। 2026 में इंग्लैंड में जून का महीना अब तक का सबसे गर्म रहा (और पूरे ब्रिटेन के लिए यह दूसरा सबसे गर्म महीना था) और इस गर्मी में तापमान के और भी ज्यादा रहने की आशंका है।
इस तरह की अत्यधिक गर्मी से भौंरों में तनाव पैदा होता है। लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से उनके विकास पर असर पड़ता है और उनकी आबादी की लंबे समय की स्थिरता खतरे में पड़ जाती है।
भीषण गर्मी का नकारात्मक असर इन भौंरों के प्रजनन, उड़ने और भोजन की तलाश करने की क्षमता पर भी पड़ता है। भौंरों जैसे सामाजिक कीट छत्ते का तापमान ठीक रखने के लिए ठंडक पहुंचाने वाले तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि ज़्यादा गर्मी होने पर अपने पंख फड़फड़ाना; लेकिन बहुत ज़्यादा गर्मी में ये तरीके कितने असरदार हो सकते हैं, इसकी भी एक सीमा होती है।
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, भौंरों की भोजन तलाशने की गतिविधि बढ़ सकती है और वे ज़्यादा दूरी तय कर सकते हैं। उड़ते समय भौंरे अपने शरीर में गर्मी को विभिन्न हिस्सों में विभाजित कर अपने तापमान को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन तापमान की अति-सीमाएं उनके स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।