किसी वर्ग को मंदिर, मठ से बाहर रखने का हिंदू धर्म पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा: न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-04-2026
Excluding any section of society from temples and monasteries will have a negative impact on Hinduism: Court
Excluding any section of society from temples and monasteries will have a negative impact on Hinduism: Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सभी मंदिरों और मठों में जाने का अधिकार होना चाहिए तथा किसी एक वर्ग को इससे बाहर रखना हिंदू धर्म पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा और समाज को बांट देगा।

नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह टिप्पणी केरल के शबरिमला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
 
पीठ विभिन्न आस्थाओं के लोगों द्वारा पालन की जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और विस्तार पर भी विचार कर रही थी।
 
पीठ में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।
 
नायर सर्विस सोसाइटी, अयप्पा सेवा समाजम और क्षेत्र संरक्षण समिति जैसे संगठनों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने दलील दी कि किसी वर्ग विशेष का मंदिर अन्य व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति दे सकता है और उन्हें पूजा-अर्चना में शामिल कर सकता है, या फिर वह इसे केवल अपने वर्ग तक ही सीमित रख सकता है।
 
इस पर, न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी की, ‘‘एक आशंका है। अगर आप प्रवेश के अधिकार की बात करते हैं, खासकर 'वेंकटरमण देवरू' मामले के संदर्भ में, जिसमें यह कहा गया था कि गौड़ सारस्वत ब्राह्मणों के अलावा किसी और को प्रवेश नहीं मिलेगा, तो इसका हिंदू धर्म पर नकारात्मक असर पड़ेगा।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक व्यक्ति को हर मंदिर और मठ में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए। शबरिमला फैसले से जुड़े विवाद को एक तरफ रख दें। लेकिन अगर आप यह कहते हैं कि यह एक परंपरा है और यह धर्म का मामला है कि मैं दूसरों को बाहर रखूंगा और केवल मेरे वर्ग, मेरे संप्रदाय के लोग ही मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं, कोई और नहीं, तो यह हिंदू धर्म के लिए अच्छा नहीं है। धर्म पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। यह उसके लिए नुकसानदायक ही साबित होगा।’’