ED writes to Tamil Nadu government, links minister to 'bribery' racket in transfers and postings
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तमिलनाडु नगर प्रशासन शहरी और जल आपूर्ति विभाग (एमएडब्ल्यूएस) में अधिकारियों और इंजीनियरों के तबादलों और नियुक्तियों में कथित तौर पर 366 करोड़ रुपये के धनशोधन और भ्रष्टाचार गिरोह के संबंध में नई जानकारी साझा की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
संघीय जांच एजेंसी के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय ने इस संदर्भ में राज्य के मुख्य सचिव और सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (डीवीएसी) को पत्र भेजकर मंत्री के एन नेहरू और उनसे जुड़े कुछ अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
ईडी ने पिछले साल अक्टूबर और दिसंबर में राज्य सरकार के अधिकारियों को दो अलग-अलग पत्र भी लिखे थे, जिनमें एमएडब्ल्यूएस के टेंडरों और भर्तियों में "व्यापक" भ्रष्टाचार का दावा किया गया था और नेहरू को इन आरोपों से जोड़ा गया था।
तब मंत्री ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि उन्हें बदनाम करने के प्रयास में ईडी लगातार उन्हें निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि वह कानूनी रूप से आरोपों का सामना करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि एमएडब्ल्यूएस के तबादलों और तैनाती में कथित भ्रष्टाचार के मामले अप्रैल 2025 में ईडी के तब संज्ञान में आए, जब एक बैंक ऋण "धोखाधड़ी" मामले में छापेमारी की गई थी जिसमें नेहरू के रिश्तेदार और कथित सहयोगी शामिल थे।
अधिकारियों के अनुसार, यह जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीबीआई की एक एफआईआर के आधार पर शुरू की थी जिसे बाद में रद्द कर दिया गया। चूंकि मूल अपराध बंद हो गया, इसलिए ईडी का मामला भी खत्म हो गया। बैंक ‘धोखाधड़ी’ मामले में आरोपियों ने एकमुश्त समझौते के तहत ऋण चुका दिया।
इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत उपलब्ध अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए इन जानकारियों और "सबूतों" को राज्य सरकार और पुलिस के साथ साझा किया ताकि वे एक आपराधिक मामला दर्ज कर सकें जो बाद में धन शोधन निवारक अधिनियम (पीएमएलए) मामला दर्ज करने का आधार बन सके।