पहली ही लड़ाई में धमाकेदार प्रदर्शन: मालेगांव में इस्लाम पार्टी का जलवा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 20-01-2026
A spectacular performance in the first battle: The Islam Party dominates Malegaon
A spectacular performance in the first battle: The Islam Party dominates Malegaon

 

आवाज़ द वायसब्यूरो, मालेगांव

पिछले तीन-चार सालों से महाराष्ट्र की ज़्यादातर महानगर पालिकाओंका कामकाज पूरी तरह से प्रशासनिक राज (Administrator rule) के तहत चल रहा था। इस वजह से शहरी इलाकों के फैसलों में अवामी नुमाइंदों (जन-प्रतिनिधियों) की कोई सीधी भागीदारी नहीं बची थी। पालिका की सारी डोर प्रशासन और कमिश्नर के हाथों में थी। आखिरकार महाराष्ट्र भर की महानगर पालिकाओं के लिए 15 जनवरी 2026 को वोटिंग हुई और 16 जनवरी को नतीजे घोषित कर दिए गए।

राज्य के 36 जिलों की कुल 29 महानगर पालिकाओं के लिए यह चुनावी प्रक्रिया चलाई गई। इन चुनावों में सियासी पार्टियों की परफॉरमेंस पर पूरे राज्य की नज़रें टिकी थीं। इसमें मालेगांव जैसे अहम मुस्लिम-बहुल शहर का भी शुमार था। मालेगांव महानगर पालिका के 84 वार्डों के लिए कांटे की टक्कर हुई। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस जैसी दो बड़ी पार्टियों में हुई टूट के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, इसलिए बदले हुए सियासी समीकरणों और पार्टियों की ताक़त के लिहाज़ से यह लड़ाई काफी अहम थी।

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'इस्लाम' ने पहली ही लड़ाई में दिखाई ताक़त

पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान ही पूर्व विधायक आसिफ शेख ने शरद पवार की एनसीपी से बाहर निकलकर 'इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र' (ISLAM - इस्लाम) नाम की नई सियासी पार्टी बनाई थी। उस वक्त इस पार्टी को कई तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इस पर 'आवाज़-द-वॉइस मराठी' ने पूर्व विधायक आसिफ शेख से बातचीत कर तफसीली जायज़ा लिया था।

लेकिन महानगर पालिका के चुनाव में इस पार्टी ने अपना वजूद साबित कर दिया है। अपनी पहली ही लड़ाई में इस इस्लाम पार्टी ने कांग्रेस की बरसों पुरानी हुकूमत को खत्म कर दिया है। इस चुनाव में इस्लाम पार्टी ने 35 सीटें जीतकर ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है, हालांकि बहुमत (अकसरियत) के लिए ज़रूरी 43 सीटों के आंकड़े से वे थोड़ा पीछे रह गए।

मालेगांव महानगर पालिका पर वर्चस्व कायम करने के बाद पूर्व विधायक आसिफ शेख ने मीडिया को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "हम पर भरोसा दिखाने के लिए सबसे पहले मैं वोटरों का शुक्रिया अदा करता हूं। महानगर पालिका में हमारा मेयर चुने जाने के बाद हम यकीनन मालेगांव का विकास बड़े पैमाने पर करेंगे।"

मालेगांव महानगर पालिका का चुनाव पूर्व और पश्चिम जैसे दो हिस्सों में हुआ। पूर्वी हिस्से में मौलाना मुफ्ती और आसिफ शेख इन मौजूदा और पूर्व विधायकों के बीच अस्तित्व की लड़ाई थी। अंसारी वोटों को अपनी तरफ खींचने के लिए शेख ने अपनी इस्लाम पार्टी के साथ शान-ए-हिंद निहाल अहमद की समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया। 'सेक्युलर फ्रंट' का यह प्रयोग काफी कामयाब रहा।

इस्लाम पार्टी ने 35 और समाजवादी पार्टी ने 6 सीटें जीतीं। 84 सदस्यों वाले सदन में बहुमत के लिए उन्हें केवल दो सदस्यों की ज़रूरत है। 'ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन' (AIMIM) के निजी टीका-टिप्पणी वाले प्रचार को वोटरों ने नकार दिया और मालेगांव के विकास का विजन रखने वाली इस्लाम पार्टी की झोली में भर-भरकर वोट डाले।

दूसरी तरफ, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी ने 21 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने का मान हासिल किया है। पिछले चुनाव में उनके पास सिर्फ 7 सीटें थीं, इसलिए यह साफ है कि उनकी ताक़त बढ़ी है। शिवसेना ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 18 सीटों पर जीत हासिल की। पिछली टर्म के मुकाबले शिवसेना को 6 सीटें ज़्यादा मिली हैं।

अकेले लड़ने का नारा देने वाली बीजेपी को वोटरों ने नकार दिया है। पार्टी को सिर्फ दो ही सीटें मिल सकीं। कांग्रेस को महज तीन सीटों पर सब्र करना पड़ा। करीब दर्जन भर पार्टियां तो अपना खाता भी नहीं खोल पाईं। कैंप संगमेश्वर के पश्चिमी हिस्से में आखिरी वक्त पर बीजेपी ने 'एकला चलो' का नारा देते हुए मंत्री दादा भुसे की शिवसेना को चुनौती दी थी।

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प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की प्रचार सभा, मंत्री गिरीश महाजन की बीजेपी का मेयर बनाने की गर्जना, 15 से 17 सीटें जीतने का नेताओं का आत्मविश्वास, भुसे और उनके समर्थकों पर टीका-टिप्पणी—ये सारे प्रयोग फेल हो गए। इसके उलट रैलियों में सिर्फ विकास पर जोर देने की वजह से पश्चिमी हिस्से के पांच वार्डों की 20 में से 18 सीटों पर जीत हासिल कर यह दिखा दिया कि भुसे का करिश्मा अब भी कायम है।

इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस को जबरदस्त झटका लगा है। बीजेपी की सदस्य संख्या घटकर सिर्फ 2 सीटों पर आ गई है। वहीं मालेगांव में कभी एकतरफा दबदबा रखने वाली कांग्रेस को इस बार सिर्फ 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। खास बात यह है कि कांग्रेस को मिली इन तीन सीटों में से दो सीटें कांग्रेस के शहराध्यक्ष एजाज बेग और उनकी पत्नी ने जीती हैं।