DPCC Issues Time-Bound 'SOP' for Action Against Violations of Noise Pollution Rules
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी में ध्वनि प्रदूषण के नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) शुरू की है जिसके तहत शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई, उचित निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह एसओपी 17 अप्रैल को जारी की गई और तुरंत लागू कर दी गई। इसका उद्देश्य शिकायत दर्ज करने से लेकर दंड तक एक व्यवस्थित प्रक्रिया बनाना और अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करना है ताकि नियमों को लागू करने में जो कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा सके।
नयी व्यवस्था के तहत डीपीसीसी प्रकोष्ठ के लिए अपने अधिकार क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण संबंधित शिकायतों को औपचारिक रूप से दर्ज कर उन पर कार्रवाई करना अनिवार्य बना दिया गया है। इसमें रेस्तरां, बार, पब और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतें भी शामिल हैं।
एसओपी के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित और रोकने के लिए लागू किया गया था।
इन नियमों का उद्देश्य लाउडस्पीकर, वाहनों के हॉर्न, निर्माण कार्य और औद्योगिक मशीनों जैसे सभी स्रोतों से ध्वनि स्तर को नियंत्रित कर जन स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा करना है।
इन नियमों में विभिन्न क्षेत्रों के लिए दिन और रात के समय ध्वनि के मानक तय किए गए हैं। संबंधित प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध है।