नई दिल्ली:
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने कहा कि भारत ऐसा विकास मॉडल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में देश ने वन क्षेत्र, जैव विविधता संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।
एक विशेष बातचीत में भूपेंद्र यादव ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, पर्यावरणीय ऑडिट और व्यापक वृक्षारोपण अभियान जैसी पहलें लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ-साथ सतत विकास को भी बढ़ावा दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रकृति हमें स्वच्छ हवा, पानी और अन्य महत्वपूर्ण संसाधन प्रदान करती है, इसलिए भविष्य की पीढ़ियों के लिए इनका संरक्षण करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से देश में बाघ अभयारण्यों, संरक्षित क्षेत्रों और जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रमों का लगातार विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के कई बायोस्फीयर रिजर्वों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की जागरूकता और भागीदारी बढ़ी है।
यादव ने कहा कि Agasthyamalai Biosphere Reserve, Khangchendzonga Biosphere Reserve, Panna Biosphere Reserve और हिमाचल प्रदेश के शीत मरुस्थल क्षेत्र जैसे कई भारतीय जैवमंडल क्षेत्रों को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है।
वनों की कटाई और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर उठने वाली चिंताओं पर मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिपूरक वनीकरण नीति यह सुनिश्चित करती है कि विकास कार्यों के लिए उपयोग की गई वन भूमि की भरपाई नए वृक्षारोपण के माध्यम से की जाए। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक विकास और आधारभूत संरचना के विस्तार के बावजूद देश में वन और वृक्ष आवरण में वृद्धि दर्ज की गई है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा देने के लिए पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) और शहरी खनन जैसी पहलों के माध्यम से कचरे में मौजूद मूल्यवान संसाधनों का पुनः उपयोग किया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ी वृद्धि की है और देश सौर, जल तथा अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों में लगातार निवेश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत International Solar Alliance के माध्यम से वैश्विक जलवायु प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
मंत्री ने विकसित देशों से जलवायु वित्त संबंधी अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने अधिकांश जलवायु और अनुकूलन कार्यक्रमों को घरेलू संसाधनों के माध्यम से वित्तपोषित किया है, लेकिन विकासशील देशों को अधिक सहयोग मिलना चाहिए।
भूपेंद्र यादव ने वायु प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण को देश की प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए स्थानीय निकायों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने अपने संदेश का समापन करते हुए कहा, “पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को साथ लेकर चलना ही भविष्य का रास्ता है। जिम्मेदार उपभोग, संसाधनों का कुशल उपयोग और जनभागीदारी के माध्यम से ही सतत विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।”