आईएनएस बाज रनवे फैसले पर पुनर्विचार की मांग: जयराम

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 12-06-2026
Demand for reconsideration of INS Baaz runway decision: Jairam
Demand for reconsideration of INS Baaz runway decision: Jairam

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के संबंध में पत्र लिखा और आईएनएस बाज रनवे के पूर्ण विस्तार को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
 
पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने 16 मई 2026 को भी रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के प्रतिकूल पारिस्थितिक प्रभावों को कम करने और साथ ही रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ग्रेट निकोबार द्वीप के गांधी नगर-शास्त्री नगर क्षेत्र में नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनाने के बजाय कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के मौजूदा रनवे का विस्तार एक विकल्प हो सकता है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘आठ जून 2026 को मीडिया में रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से खबरें आईं कि आईएनएस बाज के रनवे का विस्तार सीमित रखा जाएगा, क्योंकि इसकी लंबाई 4,500 फुट से अधिक करने पर प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव पड़ेंगे।’’
 
रमेश ने कहा, ‘‘पर्यावरण संरक्षण को लेकर अचानक दिखाई गई इस चिंता की मैं सराहना करता हूं, लेकिन कृपया निम्नलिखित तथ्यों पर भी विचार करें : गांधी नगर-शास्त्री नगर में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए 115 मीटर ऊंचाई वाली दो वनाच्छादित पहाड़ियों को काटना पड़ेगा। यह क्षेत्र लगभग 225 एकड़ संरक्षित वन और 130 एकड़ माने गए (डीम्ड) वन क्षेत्र में फैला है, जो शोम्पेन जनजातीय समुदाय के क्षेत्र का हिस्सा है और वर्तमान में उनके उपयोग में है।’’
 
रमेश ने कहा कि प्रस्तावित स्थल लगभग 142 एकड़ के ऐसे क्षेत्र में है, जो द्वीपीय तटीय विनियमन क्षेत्र (आईसीआरजेड)-1ए के अंतर्गत आता है और जिसे तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना, 2019 के तहत सर्वोच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है। इसमें कछुओं के अंडे देने वाले समुद्र तट, प्रवाल भित्तियां और संकटग्रस्त निकोबार मेगापोड पक्षी के घोंसला-स्थल शामिल हैं।
 
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए एक खाड़ी को भरना होगा और खारे पानी के मगरमच्छों को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ेगा। इसके अलावा, प्रस्तावित स्थल पर दो गांव स्थित हैं, जहां 234 पूर्व सैनिक परिवार रहते हैं और उन्हें हाल के वर्षों में तीसरी बार विस्थापन झेलना पड़ेगा।
 
रमेश ने यह भी कहा कि यह स्थल एक लगभग अछूते और प्राकृतिक वन क्षेत्र में स्थित है, जिसके आसपास अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र हैं।