दिल्ली: 31 साल पुराने अपहरण-हत्या मामले में यूट्यूबर गिरफ्तार, पहचान बदल कर रह रहा था आरोपी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 25-04-2026
Delhi: YouTuber Arrested in 31-Year-Old Kidnapping-Murder Case; Accused Was Living Under a False Identity
Delhi: YouTuber Arrested in 31-Year-Old Kidnapping-Murder Case; Accused Was Living Under a False Identity

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 

दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने 31 साल पुराने अपहरण ‍‍‍‍‍व हत्या के एक मामले के सिलसिले में स्थानीय स्तर पर एक सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर के रूप में पहचान बना चुके 54 वर्षीय एक व्यक्ति को शनिवार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि आरोपी पहचान बदलकर यहां रह रहा था।
 
पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान सलीम खान उर्फ ​​सलीम अहमद के रूप में हुई है और उसे सलीम वास्तिक के नाम से भी जाना जाता है।
 
पुलिस ने बताया कि वास्तिक को अपराध शाखा की एक टीम ने उत्तर प्रदेश के लोनी से गिरफ्तार किया।
 
पुलिस के मुताबिक, वह 2000 में मिली अंतरिम जमानत का उल्लंघन करने के बाद दो दशकों से अधिक समय से गिरफ्तारी से बच रहा था।
 
पुलिस ने बताया कि आरोपी को 1997 में उसके साथी अनिल के साथ उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक सीमेंट व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे की अपहरण के बाद हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।
 
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “जनवरी 1995 में स्कूल जाते समय लड़के का अपहरण कर लिया गया था और उसकी रिहाई के बदले 30,000 रुपये की फिरौती मांगी गई थी।”
 
अधिकारी ने बताया कि पीड़ित के पिता को अपहरणकर्ताओं का फोन आया था, जिन्होंने उन्हें लोनी फ्लाईओवर के पास एक बस स्टैंड पर फिरौती की रकम देने को कहा था।
 
उन्होंने बताया कि फोन करने वाले ने उन्हें पुलिस को सूचना न देने की चेतावनी भी दी थी।
 
अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच के दौरान शक सलीम खान पर गया, जो उस समय लड़के के स्कूल में मार्शल आर्ट प्रशिक्षक के रूप में काम कर रहा था।
 
पुलिस की एक टीम ने उससे पूछताछ की और उसके खुलासे के आधार पर दिल्ली के मुस्तफाबाद के पास एक नाले से लड़के का शव बरामद किया।
 
अधिकारी के अनुसार, सह-आरोपी अनिल की पहचान बाद में हुई और उसने फरवरी 1995 में अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
 
दिल्ली के एक सत्र न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
 
उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी।
 
अपील लंबित रहने के दौरान सलीम खान को नवंबर 2000 में अंतरिम जमानत दी गई लेकिन उसके बाद उसने आत्मसमर्पण नहीं किया।
 
उच्च न्यायालय ने उसकी सजा को बरकरार रखा।
 
अधिकारी ने बताया, “जमानत पर रिहा होने के बाद सलीम खान हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बार-बार अपना ठिकाना बदलकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचता रहा। बताया जाता है कि वह करनाल और अंबाला जैसी जगहों पर अलमारी बनाने का काम करता था और लगभग 2010 में लोनी में स्थायी रूप से बस गया।”
 
सलीम खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में खुद को कथित तौर पर मृत घोषित कर दिया और सलीम वास्तिक या सलीम अहमद के नाम से एक नई पहचान अपना ली।
 
इस पहचान के तहत वह महिलाओं के कपड़ों व अन्य सामान की दुकान चलाता था और सोशल मीडिया मंच पर भी सक्रिय हो गया, जहां उसने खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता एवं यूट्यूबर के रूप में पेश किया।
 
पुलिस ने बताया कि इस मामले में सफलता उस समय मिली जब अपराध शाखा की एक टीम को सूचना मिली, जिसका इस्तेमाल आरोपी खान की पुरानी तस्वीरों और फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड के जरिए उसकी पहचान सत्यापित करने के लिए किया गया।
 
पुलिस के मुताबिक, लोनी की स्थानीय पुलिस की सहायता से एक टीम ने अभियान को अंजाम दिया और 31 साल पुराने मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।