दिल्ली HC ने MHA, दिल्ली सरकार और पुलिस को जजों की सुरक्षा पर बैठक करने का निर्देश दिया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 24-03-2026
Delhi HC directs MHA, Delhi Govt, police to meet on judges' security
Delhi HC directs MHA, Delhi Govt, police to meet on judges' security

 

नई दिल्ली 
 
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे एक साथ बैठें और एक हफ़्ते के भीतर ज़िला अदालत के जजों की सुरक्षा के मुद्दे की समीक्षा करें। यह निर्देश दिल्ली न्यायिक सेवा संघ द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जो ट्रायल कोर्ट के जजों का प्रतिनिधित्व करता है। जस्टिस मनोज जैन ने ज़ोर देकर कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा बहुत चिंता का विषय है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने साफ़ किया कि याचिका में उठाई गई चिंताएँ गंभीर हैं और उन पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बैठक की एक विस्तृत रिपोर्ट दो हफ़्ते के भीतर उसके सामने पेश की जाए।
 
कोर्ट ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा करते समय, अधिकारियों को यह भी देखना चाहिए कि दूसरे राज्यों में न्यायिक अधिकारियों को किस तरह की सुरक्षा दी जा रही है। चिकाकर्ता संघ ने ज़िला जजों के लिए निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSOs) के साथ-साथ उनके आवासों पर उचित सुरक्षा व्यवस्था की माँग की है। संघ ने बताया कि कई जज बिना सुरक्षा के यात्रा करते हैं और उन्हें सड़कों पर पीछा किए जाने, धमकियों और आक्रामक व्यवहार जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा है। याचिका में यह भी बताया गया कि जज नियमित रूप से गंभीर आपराधिक मामलों को देखते हैं, जिनमें गैंग से जुड़े मामले भी शामिल हैं, और यहाँ तक कि कोर्ट परिसर में गोलीबारी की घटनाएँ भी हुई हैं।
 
संघ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कीर्ति उप्पल ने कोर्ट को बताया कि कई जजों को धमकियाँ मिली हैं। उन्होंने एक घटना का ज़िक्र किया जिसमें एक महिला जज को चेतावनी दी गई थी कि अगर वह सुरक्षित रहना चाहती है तो चुप रहे। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों ने न्यायिक अधिकारियों के लिए पहले ही सुरक्षा उपाय लागू कर दिए हैं। दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए, स्थायी वकील (आपराधिक) संजय लाओ ने इस मुद्दे के महत्व को स्वीकार किया और कहा कि सरकार इस पर उचित फ़ैसला लेगी। हाई कोर्ट ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि संघ ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को एक अभ्यावेदन सौंपा था, लेकिन इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं थी कि उस पर क्या कार्रवाई की गई है। इसलिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह रजिस्ट्रार जनरल को भी इस मामले में एक पक्ष बनाए और निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख से पहले उस अभ्यावेदन पर एक स्थिति रिपोर्ट दायर की जाए।