नई दिल्ली
दिल्ली सरकार 'राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम' (NTEP) के तहत मौजूद मॉलिक्यूलर टेस्टिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C की जांच और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है। जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य वायरल लोड टेस्टिंग तक पहुंच को बेहतर बनाना, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच तालमेल को मजबूत करना है।
इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C के लिए पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों का वायरल लोड टेस्ट करने के लिए NTEP के मौजूदा 'ट्रूनेट' (Truenat) मॉलिक्यूलर टेस्टिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यापक स्क्रीनिंग योजना में पोर्टेबल एक्स-रे सुविधाओं का उपयोग भी शामिल है। इसमें महिलाओं, खासकर गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि जिन स्वास्थ्य समस्याओं में आगे जांच की जरूरत हो, उनका समय रहते पता लगाया जा सके।
दिल्ली में NTEP के तहत 85 'ट्रूनेट' प्लेटफॉर्म पहले से मौजूद हैं। योजना के अनुसार, शुरुआत में हर जिले में एक प्लेटफॉर्म को हेपेटाइटिस B और C के वायरल लोड टेस्ट के लिए तय किया जाएगा। इसके लिए NTEP के राज्य कार्यक्रम अधिकारी (State Programme Officer) की सहमति जरूरी होगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस कदम से टेस्टिंग में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी और 'राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम' (NVHCP) के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
जांच क्षमता को मजबूत करने के महत्व पर जोर देते हुए, स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा, "अलग-अलग राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध संसाधनों को एक साथ लाकर, हम अपने मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और जरूरी जांच सेवाओं तक पहुंच को मजबूत कर सकते हैं। हमारा जोर इस बात पर है कि उपलब्ध टेस्टिंग सुविधाओं का कुशलता से इस्तेमाल हो, ताकि समय रहते बीमारी का पता चल सके और सही इलाज मिल सके - खासकर उन समूहों के लिए जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक है।"
इस पहल को समर्थन देने के लिए, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय कार्यक्रम प्रभाग (Central Programme Division) को हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C के लिए 2,500-2,500 'ट्रूनेट' चिप्स की मांग भेजी गई है। NVHCP की केंद्रीय इकाई ने बताया है कि वायरल लोड टेस्टिंग की कमियों को दूर करने और कार्यक्रम के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, केंद्र सरकार द्वारा ये चिप्स केंद्रीय स्तर पर खरीदे जाएंगे।
इस पहल में इन जांचों को करने वाले तकनीशियनों को प्रशिक्षण देना और उन्हें प्रोत्साहित करना भी शामिल है। जारी विज्ञप्ति के अनुसार, काम के बोझ और परिचालन संबंधी जरूरतों को देखते हुए, उपलब्ध बुनियादी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल करने और टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के लिए, मौजूदा मॉलिक्यूलर टेस्टिंग मशीनों का उपयोग नियमित कामकाजी घंटों के बाद या छुट्टियों के दिन भी किया जा सकता है।
इस एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से, दिल्ली सरकार का लक्ष्य डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत करना, मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना, और हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों की समय रहते पहचान और प्रबंधन में मदद करना है। जिला स्तर पर प्रस्तावित यह व्यवस्था, जरूरी सहमति और परिचालन संबंधी योजना के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।