नई दिल्ली
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने 'रिफॉर्म उत्सव' (Reform Utsav) अभियान के तहत दिल्ली के 'लैंड पूलिंग' (land pooling) क्षेत्रों के गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। उपराज्यपाल के निर्देशों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य जमीन मालिकों, किसानों और अन्य हितधारकों को 'लैंड पूलिंग पॉलिसी' के तहत प्रस्तावित विकास मॉडलों के बारे में जानकारी देना है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अनुसार, 'विकसित भारत 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए, 'मास्टर प्लान फॉर दिल्ली 2047' (MPD-2047) का लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी को एक भविष्य के लिए तैयार, समावेशी और टिकाऊ शहर में बदलना है, जो सभी के लिए अवसर पैदा करे।
इस अभियान में गांव-स्तर पर कई कार्यक्रम शामिल हैं, जिनका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाकर, लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करके और DDA अधिकारियों के साथ सीधा संवाद कायम करके 'लैंड पूलिंग पॉलिसी' को प्रभावी ढंग से लागू करना है। इन कार्यक्रमों के जरिए लोग अपनी चिंताएं सामने रख सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि इस पॉलिसी को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
DDA ने बक्करवाला, तिगीपुर और सुल्तानपुर डबास गांवों में सफलतापूर्वक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जो क्रमशः जोन K-1, P-II और N के अंतर्गत आते हैं। इन कार्यक्रमों में जमीन मालिकों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने अपनी जमीनों के विकास में शामिल होने की इच्छा जताई और DDA अधिकारियों से पॉलिसी को लागू करने की प्रक्रिया के बारे में सवाल पूछे।
DDA अधिकारियों ने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि जल्द ही सड़क नेटवर्क योजना और जमीन के टुकड़ों (land parcels) से जुड़ी विस्तृत जानकारी जारी कर दी जाएगी।
पॉलिसी के बारे में अधिक जानकारी देने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें शामिल करने के लिए, आने वाले समय में जोन L के छावला और सरनपुर, जोन J के नेब सराय, जोन P-I के खेरा कलां और जोन P-II के मुखमेलपुर में भी ऐसे शिविर आयोजित किए जाएंगे।
'लैंड पूलिंग पॉलिसी' लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करती है, जिसमें करीब 12 लाख नए घर बनाने की क्षमता है। यह पॉलिसी जमीन मालिकों को अपनी जमीन को स्वेच्छा से DDA के साथ मिलकर एक नियोजित विकास के लिए देने (पूल करने) की सुविधा देती है। इस विकास ढांचे में ऐसे एकीकृत इलाकों की परिकल्पना की गई है, जिनमें सड़कें, जन-सुविधाएं, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, पार्क, कमर्शियल सेंटर और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं मौजूद हों। 'लैंड पूलिंग' (भूमि एकत्रीकरण) की व्यवस्था प्लानिंग ज़ोन K-I, L, N, P-II, J (आंशिक) के क्षेत्रों में लागू होगी। इसमें अकबरपुर माजरा, बाप्रोला, बवाना, बुराड़ी, धूलसिरस, घेवरा, इब्राहिमपुर, झरोदा माजरा, नजफगढ़ और नांगली पूना जैसे गांव शामिल हैं।
लागू की गई 'लैंड पूलिंग पॉलिसी' के तहत, ज़मीन मालिकों और निजी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी से, DDA के साथ मिलकर नियोजित शहरी विकास का ढांचा तैयार किया जाएगा। यह काम ज़मीन इकट्ठा करके, टाउन प्लानिंग स्कीमों के ज़रिए या किसी अन्य मॉडल के माध्यम से किया जा सकता है। यह नीति 'इंफ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट' (बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता) के दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है। इसके तहत DDA 'रोड नेटवर्क प्लान' (RNP) का चरणबद्ध विकास करेगा, जिसमें 30 मीटर या उससे अधिक 'राइट ऑफ वे' (RoW) वाली सड़कें शामिल होंगी। 600 किलोमीटर से अधिक के नए सड़क नेटवर्क की योजना के ज़रिए, इस नीति का उद्देश्य कनेक्टिविटी को मज़बूत करना, आवाजाही को बेहतर बनाना, ज़मीन की वैल्यू बढ़ाना और दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शहरी विकास से पहले बुनियादी ढांचे का विकास हो जाए।
20 हेक्टेयर की प्लानिंग स्कीमों का प्रावधान बड़े और लगातार जुड़े हुए ज़मीन के टुकड़ों का इंतज़ार किए बिना, तेज़ और चरणबद्ध विकास को संभव बनाएगा। साथ ही, इससे ज़्यादा से ज़्यादा हितधारकों की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा। 'राइट ऑफ वे' (RoW) पर आधारित प्लानिंग से ऐसे मिश्रित उपयोग वाले इलाकों के विकास में मदद मिलेगी, जहाँ घर, कार्यस्थल, बाज़ार और सार्वजनिक सेवाएं एक साथ मौजूद हों।
'अर्बन एक्सटेंशन रोड-II' (UER-II) के किनारे बनने वाले 'हाई डेंसिटी कॉरिडोर' का उद्देश्य किफायती आवास, कमर्शियल विकास, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा देना है। यह नीति प्रक्रियाओं को सरल बनाती है, अनावश्यक कानूनी या प्रशासनिक बाधाओं को दूर करती है और काम को आसानी से लागू करने के लिए प्लानिंग में अधिक लचीलापन प्रदान करती है।
ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है। इस नीति के तहत सेक्टर 8B, गांव गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर, सबसे पहले लागू होने के लिए तैयार (नोटिफाइड) सेक्टर के रूप में सामने आए हैं। यह नियोजित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और अन्य सेक्टरों में भी इसी तरह के विकास का रास्ता खोलता है।
DDA ने कहा है कि वह 'लैंड पूलिंग पॉलिसी' को समय पर लागू करके, बुनियादी ढांचे की समन्वित योजना बनाकर, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और ज़मीन मालिकों, किसानों तथा स्थानीय समुदायों के साथ लगातार संवाद बनाए रखकर दिल्ली के नियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इन प्रयासों से शहर के शहरी विकास की संभावनाओं के द्वार खुलेंगे, नए अवसर पैदा होंगे और भविष्य के लिए तैयार राजधानी के विकास में योगदान मिलेगा।