आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नेपाल में 2015 के विनाशकारी भूकंप से बेघर हुए लोगों को जिस गांव में नयी जिंदगी शुरू करने के लिए बसाया गया था, वह करीब 11 साल बाद आई भीषण बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गया। इस त्रासदी ने आपदा पीड़ितों को असुरक्षित स्थानों पर बसाने के खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
खाल्टे गांव में रहने वाले छेकू लामा ने बताया कि जब बाढ़ आई तो उन्होंने लोगों को जान बचाकर भागने के लिए आगाह किया और खुद ऊंचाई वाले स्थान की ओर दौड़ पड़े। कुछ लोग उनके पीछे भी भागे, लेकिन उनमें से अधिकतर लोग जीवित नहीं बच सके।
लामा ने बताया कि नेपाल के रसुवा जिले में स्थित खाल्टे गांव को 2015 के भूकंप में आसपास के गांव तबाह होने के बाद अस्थायी बस्ती के रूप में बसाया गया था लेकिन एक संकरी घाटी में त्रिशूली नदी के किनारे बसे इस गांव के घर बाढ़ से सुरक्षित नहीं थे।
26 अगस्त को जब बाढ़ का पानी अचानक गांव में घुसा तो लोगों के पास जान बचाकर निकलने के बहुत कम रास्ते थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कम से कम 375 लोग लापता बताए गए हैं। पूरा गांव बाढ़ में तबाह हो गया।