दाभोलकर हत्याकांड: अदालत ने दोषी सचिन अंदुरे को जमानत दी, उम्रकैद की सजा पर रोक लगाई

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 18-08-2026
Dabholkar murder case: Court grants bail to convict Sachin Andure, stays life sentence
Dabholkar murder case: Court grants bail to convict Sachin Andure, stays life sentence

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में दोषी सचिन अंदुरे को ज़मानत दे दी।

न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिन्हा भोंसले की पीठ ने 2024 में सत्र अदालत द्वारा अंदुरे को सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर भी रोक लगा दी।
 
विस्तृत आदेश की प्रति अभी उपलब्ध नहीं है।
 
कार्यकर्ता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में भी मुकदमे का सामना कर रहा अंदुरे अब जेल से बाहर आ सकता है, क्योंकि उसे दोनों मामलों में ज़मानत मिल गई है।
 
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक 67 वर्षीय दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
 
शुरुआत में, इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर किए जाने के बाद, 2014 में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।
 
अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि अंदुरे हमलावरों में से एक था।
 
दस मई 2024 को, एक सत्र अदालत ने दाभोलकर की हत्या के मामले में अंदुरे और शरद कालस्कर को दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।
 
हालांकि, उन्हें गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया था।
 
अदालत ने अपर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को भी बरी कर दिया था।
 
अंदुरे ने अपनी सज़ा को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी और एक अंतरिम अर्जी में ज़मानत तथा अपनी उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।