आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने एक महिला वकील पर उसके पति द्वारा कथित तौर पर किए गए क्रूर हमले का सोमवार को संज्ञान लिया और दिल्ली पुलिस आयुक्त को जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अधिमानतः एसीपी या डीसीपी रैंक की महिला अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच अधिकारी को तीन अस्पतालों द्वारा पीड़िता को भर्ती करने से इनकार करने संबंधी पहलू की जांच करने का भी निर्देश दिया।
पुलिस की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को सूचित किया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पीड़िता के पति को 25-26 अप्रैल की दरमियानी रात गिरफ्तार कर लिया गया था।
पीठ ने कहा कि तत्काल हस्तक्षेप के अनुरोध वाले एक पत्र के बाद उसने मामले में स्वतः संज्ञान लिया।
शीर्ष अदालत ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि शिकायत में पीड़िता के ससुराल वालों पर आरोप है कि वे उसके दो नाबालिग बच्चों को अपने साथ ले गए हैं और उनका पता नहीं चल पा रहा है।
पीठ ने पुलिस को दोनों बच्चों का पता लगाने का निर्देश दिया। पीठ ने जांच अधिकारी को जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
सोनिया विहार के निवासी आरोपी मनोज कुमार को रविवार को खजूरी खास इलाके से गिरफ्तार किया गया।