आरबीआई के धोखाधड़ी नियमों के हर उल्लंघन की जांच अदालत नहीं कर सकती : बंबई उच्च न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 24-02-2026
Court cannot investigate every violation of RBI's fraud rules: Bombay High Court
Court cannot investigate every violation of RBI's fraud rules: Bombay High Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ‘मास्टर डायरेक्शन’ का उद्देश्य धोखाधड़ी एवं कपटपूर्ण उधारकर्ताओं की पहचान कर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है और इनके प्रत्येक उल्लंघन को न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं लाया जा सकता।

उद्योगपति अनिल अंबानी के खातों को ‘‘धोखाधड़ी’’ के रूप में वर्गीकृत करने की तीन बैंक की कार्रवाई पर लगी रोक हटाते हुए अदालत ने यह बात कही।
 
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड़ की खंडपीठ ने एकल पीठ के दिसंबर 2025 के उस अंतरिम आदेश को सोमवार को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘‘धोखाधड़ी’’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।
 
अदालत ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंक और लेखा परामर्श कंपनी बीडीओ इंडिया एलएलपी की, दिसंबर 2025 में पारित एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
 
अंबानी के वकीलों ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि आदेश पर रोक लगाई जाए ताकि वे उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकें, लेकिन अदालत ने यह मांग ठुकरा दी।
 
मंगलवार को उपलब्ध कराए गए फैसले की प्रति के अनुसार, अदालत ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ‘मास्टर डायरेक्शन’ की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती जिससे ऋणदाता बैंकों के हितों को क्षति पहुंचे।
 
आरबीआई का ‘मास्टर डायरेक्शन’ विभिन्न विषयों पर समय-समय पर जारी किए गए सभी परिपत्रों/दिशा-निर्देशों का एक समेकित, अद्यतन और व्यवस्थित दस्तावेज है।