31 मार्च से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, 1 अप्रैल 2026 से बदल जाएंगे फाइनेंशियल नियम

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 31-03-2026
Complete these essential tasks before March 31; financial rules will change starting April 1, 2026.
Complete these essential tasks before March 31; financial rules will change starting April 1, 2026.

 

नई दिल्ली 

वित्तीय वर्ष 2025-26 अब समाप्ति की ओर है और 31 मार्च 2026 इसकी आखिरी तारीख है। ऐसे में यह समय हर टैक्सपेयर्स और निवेशक के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। 1 अप्रैल 2026 से कई नए वित्तीय नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, सेविंग्स और निवेश पर पड़ेगा। अगर आपने समय रहते जरूरी काम पूरे नहीं किए, तो आपको आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पेनल्टी भी भरनी पड़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि 31 मार्च से पहले अपने सभी जरूरी वित्तीय कार्यों को निपटा लिया जाए, ताकि आप नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत बिना किसी परेशानी के कर सकें।

सबसे पहले बात करते हैं पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) की। अगर आपने इनमें निवेश किया हुआ है, तो आपको हर साल न्यूनतम राशि जमा करना अनिवार्य होता है। PPF खाते में सालाना कम से कम 500 रुपये जमा करना जरूरी है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना में यह राशि 250 रुपये है। यदि आप 31 मार्च तक यह न्यूनतम निवेश नहीं करते हैं, तो आपका खाता निष्क्रिय या डिफॉल्ट की श्रेणी में चला जाएगा। इसके बाद खाते को दोबारा सक्रिय करने के लिए आपको जुर्माना देना पड़ेगा। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि आप समय रहते इन खातों में न्यूनतम राशि जरूर जमा कर दें।

इसके बाद नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की बात करें तो यह रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसमें निवेश करके आप न केवल अपने भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं, बल्कि टैक्स बचत का भी लाभ उठा सकते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 80CCD(1B) के तहत NPS में 50,000 रुपये तक के अतिरिक्त निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। हालांकि, इस योजना में अपने टियर-1 अकाउंट को सक्रिय बनाए रखने के लिए आपको हर वित्तीय वर्ष में कम से कम 1,000 रुपये का योगदान करना आवश्यक होता है। अगर आप 31 मार्च की समयसीमा तक यह योगदान नहीं करते हैं, तो आपका खाता निष्क्रिय हो सकता है और आप टैक्स बचत के इस अवसर से भी वंचित रह सकते हैं।

तीसरा महत्वपूर्ण कार्य है पैन और आधार को लिंक करना तथा KYC प्रक्रिया को पूरा करना। सरकार ने अब पैन कार्ड को आधार से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। अगर आपने अभी तक यह काम नहीं किया है, तो इसे तुरंत पूरा करें। इसके अलावा, अगर आपके बैंक खाते, डिमैट अकाउंट या अन्य वित्तीय सेवाओं में KYC अपडेट नहीं है, तो उसे भी जल्द से जल्द पूरा कर लें। अधूरी KYC या पैन-आधार लिंक न होने की स्थिति में आपके बैंकिंग लेनदेन रुक सकते हैं, आपका डिमैट अकाउंट फ्रीज हो सकता है और आपको कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

चौथा जरूरी पहलू टैक्स सेविंग निवेश से जुड़ा है। अगर आप अभी भी पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत टैक्स भरते हैं, तो आपके पास 31 मार्च तक टैक्स बचाने का आखिरी मौका है। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत आप 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। इसके अंतर्गत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम (LIC), इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), 5 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), और बच्चों की ट्यूशन फीस जैसे निवेश शामिल होते हैं। इसके अलावा, धारा 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान करके भी अतिरिक्त टैक्स बचाया जा सकता है। यह जरूरी है कि आप इन सभी निवेशों के प्रमाण 31 मार्च से पहले जमा कर दें, ताकि आप इनका पूरा लाभ उठा सकें।

अंत में, होम लोन लेने वालों के लिए भी मार्च का महीना बेहद अहम होता है। अगर आपने होम लोन लिया हुआ है, तो आप इसके प्रिंसिपल और ब्याज दोनों पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। धारा 80C के तहत लोन के मूलधन (प्रिंसिपल) पर छूट मिलती है, जबकि धारा 24(b) के तहत ब्याज पर टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है। यदि आप इस वित्तीय वर्ष में अपना टैक्स बोझ कम करना चाहते हैं, तो 31 मार्च से पहले होम लोन की कुछ अतिरिक्त प्री-पेमेंट कर सकते हैं। इससे न केवल आपके लोन का ब्याज कम होगा, बल्कि आपको टैक्स में भी राहत मिलेगी।

 

कुल मिलाकर, 31 मार्च 2026 से पहले इन सभी जरूरी वित्तीय कार्यों को पूरा करना बेहद आवश्यक है। चाहे वह PPF और सुकन्या योजना में न्यूनतम निवेश हो, NPS में योगदान हो, पैन-आधार लिंक करना हो, टैक्स सेविंग निवेश करना हो या होम लोन की प्री-पेमेंट—इन सभी कार्यों को समय पर पूरा करके आप न केवल पेनल्टी से बच सकते हैं, बल्कि अपने वित्तीय भविष्य को भी सुरक्षित बना सकते हैं। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सही योजना बनाकर और समय पर कदम उठाकर आप अपने पैसे का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं और अधिकतम टैक्स बचत का लाभ उठा सकते हैं।