आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वाणिज्य विभाग ने घरेलू उद्योगों में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से पैदा होने वाले अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एफटीए उपयोगिता प्रकोष्ठ बनाया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि ये समझौते निर्यातकों और उद्योगों को शुल्क के मामले में निश्चितता प्रदान करते हैं।
अग्रवाल ने यहां ‘भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन’ में कहा, ‘‘हमने वाणिज्य विभाग में एफटीए उपयोगिता प्रकोष्ठ बनाया है। इस प्रकोष्ठ का उद्देश्य सबसे पहले उद्योग संघों, निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और राज्य सरकारों के माध्यम से देशभर के प्रत्येक उद्यमी को एफटीए और उनसे मिलने वाले अवसरों के बारे में बताना है, ताकि लोग समझ सकें कि मुक्त व्यापार समझौते क्या उपलब्ध कराते हैं और ये कारोबार के लिए किस तरह नए अवसर हैं।’’
उन्होंने कहा कि दूसरा उद्देश्य सभी निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ मिलकर एफटीए के उपयोग को बढ़ाना है। इसके तहत प्रत्येक साझेदार देश के बाजार के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी और अगले चार-पांच वर्षों तक उस पर काम किया जाएगा, ताकि इन एफटीए के जरिये साझेदार देशों के बाजारों और भारतीय बाजार के बीच वास्तविक एकीकरण हो सके।
भारत ने चार देशों के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) समूह, न्यूजीलैंड, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, ओमान, यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिए हैं।
भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) पिछले साल अक्टूबर में लागू हुआ था। ईएफटीए के सदस्य आइसलैंड, लीश्टेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं।
सचिव ने कहा कि ईएफटीए समझौते को अलग से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि भारत ने 27 देशों वाले यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ भी व्यापार समझौते अंतिम रूप दिए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कुल मिलाकर, इस क्षेत्र के 32 देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता होगा, जहां हमारे ज्यादातर व्यापार पर शून्य शुल्क होगा। हमने उनके लिए अपने बाजार खोले हैं और उन्होंने हमारे लिए अपने बाजार खोले हैं।’’