कोयला घोटाला: विजय दर्डा समेत अन्य पर ED का PMLA केस खत्म

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 13-07-2026
Coal Scam: Delhi court drops ED's PMLA case against Ex-MP Vijay Darda, Manoj Jayaswal and others after acquittal in CBI case.
Coal Scam: Delhi court drops ED's PMLA case against Ex-MP Vijay Darda, Manoj Jayaswal and others after acquittal in CBI case.

 

नई दिल्ली
 
राउज़ एवेन्यू कोर्ट में 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत बनी स्पेशल कोर्ट ने पूर्व सांसद विजय डर्डा, उनके बेटे देवेंद्र डर्डा, बिज़नेसमैन मनोज कुमार जायसवाल और अभिषेक जायसवाल के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही को बंद कर दिया है। यह फ़ैसला उन्हें बांदर कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े CBI के मुख्य मामले में बरी किए जाने के बाद लिया गया है। स्पेशल जज सुनेना शर्मा ने यह आदेश तब दिया जब उन्होंने देखा कि आरोपियों को उस 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' (मुख्य अपराध) में पहले ही बरी कर दिया गया था, जो PMLA के तहत ED की कार्यवाही का आधार था।
 
ED ने आरोप लगाया था कि मनोज कुमार जायसवाल से जुड़ी कंपनियों से विजय और देवेंद्र डर्डा से जुड़ी कंपनी में ट्रांसफर किए गए लगभग ₹24.6 करोड़, बांदर कोल ब्लॉक आवंटन में कथित 'क्विड प्रो क्वो' (लेन-देन) से हुई "अपराध की कमाई" (proceeds of crime) थे। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के 27 मार्च, 2026 के उस फ़ैसले के बाद आया है जिसमें विजय डर्डा, देवेंद्र डर्डा, मनोज कुमार जायसवाल, M/s AMR आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड और पूर्व कोयला सचिव H.C. गुप्ता सहित सभी आरोपियों को बांदर कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े CBI मामले में बरी कर दिया गया था।
 
यह मामला कोल ब्लॉक आवंटन की जांच में CBI द्वारा दायर पहली चार्जशीट थी।
आरोपियों की ओर से पेश वकीलों मुदित जैन, युगांत शर्मा और खोनीशा गनवीर ने तर्क दिया कि PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' के होने पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जब सभी आरोपियों को मुख्य अपराध (प्रेडिकेट ऑफ़ेंस) में बरी कर दिया गया, तो ED की कार्यवाही का आधार ही खत्म हो गया, और कथित ₹24.6 करोड़ को अब अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता।
 
ED ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट के पास इस चरण में कार्यवाही बंद करने की शक्ति नहीं है। हालाँकि, बचाव पक्ष ने 'विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि किसी 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' के न होने पर PMLA के तहत कार्यवाही नहीं चल सकती। बचाव पक्ष की दलीलों को मानते हुए, कोर्ट ने सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही बंद कर दी।
 
मूल CBI मामले के अनुसार, AMR आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड... आरोप था कि लिमिटेड कंपनी ने तत्कालीन कोयला सचिव के साथ मिलकर गलत जानकारी देकर बांदर कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल किया था। वहीं, तत्कालीन राज्यसभा सांसद विजय डार्डा पर आरोप था कि उन्होंने पैसे के बदले कंपनी को आवंटन दिलाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखे थे।
 
हालांकि, 11 साल तक चले मुकदमे के बाद स्पेशल कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष कोई बेईमानी का इरादा, कथित भुगतान और कोयला ब्लॉक आवंटन के बीच कोई संबंध, या यह साबित करने में नाकाम रहा कि पत्रों ने आवंटन प्रक्रिया को प्रभावित किया था। नतीजतन, सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस आदेश के साथ ही, बांदर कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर कार्यवाही भी आरोपियों के पक्ष में समाप्त हो गई है।
 
वकील मुदित जैन, युगांत शर्मा और खोनीशा गनवीर ने PMLA कार्यवाही में आरोपियों का प्रतिनिधित्व किया और संबंधित CBI मुकदमे में भी उनकी ओर से पेश हुए थे।
 
राउज़ एवेन्यू कोर्ट में 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत बनी स्पेशल कोर्ट ने पूर्व सांसद विजय डर्डा, उनके बेटे देवेंद्र डर्डा, बिज़नेसमैन मनोज कुमार जायसवाल और अभिषेक जायसवाल के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही को बंद कर दिया है। यह फ़ैसला उन्हें बांदर कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े CBI के मुख्य मामले में बरी किए जाने के बाद लिया गया है। स्पेशल जज सुनेना शर्मा ने यह आदेश तब दिया जब उन्होंने देखा कि आरोपियों को उस 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' (मुख्य अपराध) में पहले ही बरी कर दिया गया था, जो PMLA के तहत ED की कार्यवाही का आधार था।
 
ED ने आरोप लगाया था कि मनोज कुमार जायसवाल से जुड़ी कंपनियों से विजय और देवेंद्र डर्डा से जुड़ी कंपनी में ट्रांसफर किए गए लगभग ₹24.6 करोड़, बांदर कोल ब्लॉक आवंटन में कथित 'क्विड प्रो क्वो' (लेन-देन) से हुई "अपराध की कमाई" (proceeds of crime) थे। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के 27 मार्च, 2026 के उस फ़ैसले के बाद आया है जिसमें विजय डर्डा, देवेंद्र डर्डा, मनोज कुमार जायसवाल, M/s AMR आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड और पूर्व कोयला सचिव H.C. गुप्ता सहित सभी आरोपियों को बांदर कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े CBI मामले में बरी कर दिया गया था।
 
यह मामला कोल ब्लॉक आवंटन की जांच में CBI द्वारा दायर पहली चार्जशीट थी।
आरोपियों की ओर से पेश वकीलों मुदित जैन, युगांत शर्मा और खोनीशा गनवीर ने तर्क दिया कि PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' के होने पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जब सभी आरोपियों को मुख्य अपराध (प्रेडिकेट ऑफ़ेंस) में बरी कर दिया गया, तो ED की कार्यवाही का आधार ही खत्म हो गया, और कथित ₹24.6 करोड़ को अब अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता।
 
ED ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट के पास इस चरण में कार्यवाही बंद करने की शक्ति नहीं है। हालाँकि, बचाव पक्ष ने 'विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि किसी 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' के न होने पर PMLA के तहत कार्यवाही नहीं चल सकती। बचाव पक्ष की दलीलों को मानते हुए, कोर्ट ने सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही बंद कर दी।
 
मूल CBI मामले के अनुसार, AMR आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड... आरोप था कि लिमिटेड कंपनी ने तत्कालीन कोयला सचिव के साथ मिलकर गलत जानकारी देकर बांदर कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल किया था। वहीं, तत्कालीन राज्यसभा सांसद विजय डार्डा पर आरोप था कि उन्होंने पैसे के बदले कंपनी को आवंटन दिलाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखे थे।
 
हालांकि, 11 साल तक चले मुकदमे के बाद स्पेशल कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष कोई बेईमानी का इरादा, कथित भुगतान और कोयला ब्लॉक आवंटन के बीच कोई संबंध, या यह साबित करने में नाकाम रहा कि पत्रों ने आवंटन प्रक्रिया को प्रभावित किया था। नतीजतन, सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस आदेश के साथ ही, बांदर कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर कार्यवाही भी आरोपियों के पक्ष में समाप्त हो गई है।
 
वकील मुदित जैन, युगांत शर्मा और खोनीशा गनवीर ने PMLA कार्यवाही में आरोपियों का प्रतिनिधित्व किया और संबंधित CBI मुकदमे में भी उनकी ओर से पेश हुए थे।