शारीरिक चुनौतियों को मात देकर पैरा एशियाई खेलों में पदक जीतना चमारिया का लक्ष्य

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 17-10-2026
Chamariya aims to overcome physical challenges and win a medal at the Para Asian Games
Chamariya aims to overcome physical challenges and win a medal at the Para Asian Games

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 कभी ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले सचिन चमारिया अब शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए पैरा एशियाई खेलों में बोकिया में देश के लिए पदक जीतने के सपने को पूरा करना चाहते हैं।

वर्ष 2008 में एक दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद उनका खेल करियर बदल गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले चमारिया ने ताइक्वांडो छोड़कर क्लब थ्रो जैसे खेल में हाथ आजमाने के बाद बोकिया (बीसी3 वर्ग) को चुना।
 
बोकिया दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विकसित सटीक निशाने और रणनीति पर आधारित खेल है। यह पैरालंपिक खेलों का हिस्सा है। इसमें खिलाड़ी रंगीन गेंदों को ‘लक्ष्य गेंद’ के जितना संभव हो सके करीब पहुंचाने की कोशिश करते हैं। बीसी3 वर्ग में गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ी रैंप का इस्तेमाल कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सहायक उनकी मदद करता है, लेकिन शॉट की दिशा और रणनीति का फैसला खिलाड़ी स्वयं करता है।
 
सचिन वर्ष 2021 में बोकिया से जुड़े थे। वह इसके कई राष्ट्रीय खिताब जीत चुके हैं। उन्होंने हाल ही में काहिरा में आयोजित 2026 विश्व बोकिया चैलेंजर में एकल वर्ग में कांस्य और युगल वर्ग में रजत पदक जीता था।