असम में मानव-हाथी संघर्ष घटाने की पहल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 17-10-2026
Assam: Aaranyak holds community consultations on HEC mitigation in 2 hotspots
Assam: Aaranyak holds community consultations on HEC mitigation in 2 hotspots

 

गुवाहाटी (असम)
 
असम के तामुलपुर और उससे सटे बक्सा जिले में, 18 सितंबर और 6 अक्टूबर को दो वयस्क हाथियों की मौत हो गई। माना जा रहा है कि इन्हें जानबूझकर बिजली का करंट देकर मारा गया था। वहीं, 25 सितंबर को तामुलपुर जिले में एक जंगली हाथी के साथ हुई मुठभेड़ में एक व्यक्ति की भी मौत हो गई। पिछले डेढ़ महीने में हुई इन गंभीर घटनाओं को देखते हुए, 'अरण्यक' (Aaranyak) ने तुरंत कदम उठाने का फैसला किया। इसके अलावा, फसल कटाई का मौसम चल रहा है, जिसके कारण पश्चिमी असम के कई हिस्सों में इंसान और हाथियों के बीच टकराव (human–elephant conflict) काफी बढ़ गया है।
 
'IUCN SSC सेंटर फॉर स्पीशीज सर्वाइवल एशियन एलिफेंट रैपिड रिस्पॉन्स 2026 ग्रांट' के सहयोग से और असम राज्य वन विभाग के साथ मिलकर, 'अरण्यक' ने 9 अक्टूबर 2026 को तामुलपुर जिले के चार गांवों में सामुदायिक परामर्श और जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित कीं। यह एक तत्काल की गई पहल थी। इनमें से एक कार्यशाला शांतिपुर गांव में और दूसरी अभयपुर गांव में आयोजित की गई।
 
इन सामुदायिक बैठकों का मुख्य उद्देश्य काम शुरू करने से पहले लोगों को शामिल करना था। 2026 ग्रांट के तहत चुने गए गांवों के लोगों ने इसमें भाग लेने की इच्छा जताई। उन्होंने इंसान-हाथी टकराव को कम करने वाले उपकरणों को लगाने के लिए सही जगहों के सुझाव दिए। साथ ही, उन्होंने ऐसे लोगों और परिवारों की पहचान करने में मदद की, जिन्हें अंधेरे में गांव के भीतर आने-जाने के लिए या हाथियों के घुसने से अपनी साझा संपत्तियों की रक्षा करने के लिए सर्चलाइट की जरूरत है। इन बैठकों से यह सुनिश्चित हुआ कि स्थानीय समुदाय को पूरी जानकारी मिले और इंसान-हाथी टकराव को कम करने के लिए किए जाने वाले कार्यों में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
 
इस बातचीत के जरिए यह समझने का मौका भी मिला कि स्थानीय समुदाय इन गतिविधियों को लेकर क्या सोचता है और भविष्य में वे इसमें किस तरह से शामिल होना चाहते हैं। चूंकि स्थानीय समुदाय हमारे साथ सीधे जुड़े हुए थे, इसलिए हमने इस बेहतरीन और दुर्लभ मौके का फायदा उठाते हुए उन्हें हाथियों के संरक्षण और इंसान-हाथी के बीच सह-अस्तित्व (coexistence) के बारे में जागरूक किया। इन दो कार्यक्रमों में लगभग 110 लोगों ने हिस्सा लिया। आरण्यक के 'एलीफेंट रिसर्च एंड कंज़र्वेशन डिवीज़न' (ERCD) की प्रोजेक्ट ऑफिसर अनुष्का सैकिया - जिन्हें 'IUCN SSC CSS एशियन एलिफेंट रैपिड रिस्पॉन्स 2026 ग्रांट' भी मिली है - ने सत्रों का संचालन किया, जबकि उसी डिवीज़न की प्रोजेक्ट ऑफिसर अभिलाषा बरुआ ने जागरूकता सत्रों का आयोजन किया।
 
आरण्यक के फील्ड और ग्राउंड स्टाफ - रूपम गोयारी, अभिजीत सैकिया और सचिन बसनेत - ने इन कार्यक्रमों के दौरान ज़रूरी सहायता प्रदान की। तमूलपुर ज़िले के कुमारिकाटा रेंज के वन विभाग के कर्मचारी भी इन कार्यक्रमों में शामिल हुए।
दूसरी ओर, बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) के पर्यावरण और वन विभाग ने 'आरण्यक' (जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए समर्पित एक पंजीकृत संस्था) के 'लीगल एंड एडवोकेसी डिवीज़न' (LAD) के सहयोग से, रायमोना नेशनल पार्क के फ्रंटलाइन वन कर्मचारियों को गश्त (पेट्रोलिंग) के लिए साइकिलें उपलब्ध कराईं।
14 अक्टूबर को रायमोना नेशनल पार्क के सेंट्रल रेंज स्थित कचुगांव फॉरेस्ट IB में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वन कर्मचारियों को 10 साइकिलें सौंपी गईं। इससे उनकी फील्ड मोबिलिटी (आवाजाही), गश्त की गतिविधियों और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को मज़बूती मिलेगी।
 
इस सहयोग का उद्देश्य वन कर्मियों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है, ताकि वे अपने कर्तव्यों का पालन और अधिक टिकाऊ ढंग से कर सकें। ये पहल फ्रंटलाइन कर्मियों को समर्थन देने के प्रति आरण्यक की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। ये कर्मी वन्यजीवों की सुरक्षा और पार्क की समृद्ध जैव विविधता को बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस कार्यक्रम में BTC के फॉरेस्ट एग्जीक्यूटिव मेंबर (EM) जेम्स बसुमतारी, गोसाईगांव के विधायक सभाराम बसुमतारी, BTC वन विभाग की चीफ हेड ऑफ डिवीज़न (CHD) डॉ. सोनाली घोष, कचुगांव के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर मुस्तफा अली अहमद, हल्तुगांव के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर पी.के. भुइयां और आरण्यक के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. विभूति प्रसाद लाहकर मौजूद थे।
 
इस कार्यक्रम में रायमोना नेशनल पार्क के लगभग 60 वन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इससे वन्यजीव सुरक्षा और पार्क प्रबंधन को मज़बूत करने में संरक्षण संगठनों और वन विभाग के बीच आपसी सहयोग के महत्व पर प्रकाश पड़ा। इस कार्यक्रम का समन्वय 'आरण्यक' की बिनीता बरुवती ने किया, जिसमें उन्हें आइवी फरहीन हुसैन, बिजीत बरो, मिज़िंग बोरो, गायत्री दत्ता, राज लिम्बु, बिरदत्ता बोरो, धनंजय मशाहरी और अजय बसुमतारी का सहयोग मिला। 'आरण्यक' की इस पहल का उद्देश्य रायमोना नेशनल पार्क में अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के मनोबल, तैयारियों और कार्य-क्षमता को बढ़ाना है, ताकि वहाँ गश्त (पेट्रोलिंग) और संरक्षण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
'आरण्यक', संरक्षण के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में वन विभाग के निरंतर सहयोग और भागीदारी के लिए उनका आभार व्यक्त करता है।