आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को पड़ोसी राज्य कर्नाटक के साथ कावेरी जल विवाद को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख करते हुए कहा कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की ओर से उसे आवंटित पानी की मात्रा और पड़ोसी राज्य की ओर से छोड़े गए पानी की मात्रा कम है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ वकीलों के साथ चर्चा की थी।
कर्नाटक के जलाशयों - कृष्णराज सागर (केआरएस), काबिनी, हारंगी और हेमवती- में तीन अगस्त तक कुल 77.537 टीएमसी (अरब घन फुट) पानी था और कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से का पानी छोड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी।
बयान में कहा गया है कि हाल में कर्नाटक के केआरएस और काबिनी बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद, बिलिगुंडलू में मिलने वाला पानी 26.954 टीएमसी होना चाहिए।
बयान के अनुसार, ‘‘इस हिसाब से, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का 4.536 टीएमसी पानी आवंटित करने का आदेश उपयुक्त मात्रा से बहुत कम है।’’
इसमें कहा गया है कि कर्नाटक, तमिलनाडु को पानी का उसका वाजिब हिस्सा देने में ‘‘नाकाम’’ रहा है।