आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के पश्चिमी भागों में सूखे जैसी स्थिति की ओर इशारा करते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि वहां गोवंश भूख व प्यास से मर रहे हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। गहलोत ने एक बयान में दावा किया,‘‘पश्चिमी राजस्थान में गोवंश भूख और प्यास से मर रहे हैं और राज्य सरकार केवल घोषणाएं कर निश्चिंत बैठी है।’’
उन्होंने कहा,‘‘अखबार सूखे और अकाल की खबरों से भरे पड़े हैं। 30 सितंबर को मुख्यमंत्री ने बाड़मेर में चारा डिपो खोलने की घोषणा की थी। आठ दिन बाद भी न कोई चारा डिपो खुला, न पशु शिविर।’’
कांग्रेस नेता ने कहा,‘‘गडरारोड में स्थानीय प्रशासन कह रहा है कि 23 पटवार मंडलों में चारा डिपो के प्रस्ताव प्रस्ताव भेजे हैं, पर मंजूरी नहीं मिली। प्रशासन आचार संहिता की आड़ ले रहा है जबकि सवाल यह है कि सूखा साफ दिख रहा था तो आचार संहिता से पहले तैयारी क्यों नहीं हुई, और राहत के लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति क्यों नहीं मांगी गई?'
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के अनुसार दर्जनों गांवों में गायें मर चुकी हैं, गायें प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हैं चारा तीन गुना महंगा हो गया है और जमाखोरी की शिकायतें हैं।
गौशालाओं को सरकार रोज हर बड़े पशु के लिए 50 रुपये देती है, जबकि संचालकों के मुताबिक खर्च 100 से 150 रुपये है। गौशालाओं का अनुदान भी समय पर नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने कहा,‘‘हालात यह हैं कि खुद भाजपा विधायक तक सरकार से तुरंत सूखे की घोषणा करने की मांग कर रहे हैं पर सरकार नहीं सुन रही।’’
गहलोत ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा,‘‘गाय के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार जवाब दे, गोवंश कब तक चारे-पानी को तरसेगा?’’