आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष को सदन एवं संविधान की मर्यादा की रक्षा के लिए बिरला के खिलाफ संकल्प लाना पड़ा है।
बिरला को हटाने के लिए सदन में लाए गए संकल्प पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गोगोई ने यह आरोप भी लगाया कि वर्तमान समय में लोकसभा में माइक को भी एक ‘अस्त्र’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है तथा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को वर्तमान बजट सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बोलने से 20 से अधिक बार रोका गया।
इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने यह संकल्प सदन में प्रस्तुत किया।
गोगोई ने कहा, ‘‘देश को पता होना चाहिए कि किस तरह से संविधान और सदन की मर्यादा का उल्लंघन हो रहा है।’’
उन्होंने कहा कि इस संकल्प को लाने में विपक्ष को कोई खुशी नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘बिरला जी का व्यक्तिगत रूप से सभी के साथ रिश्ता अच्छा है। हमें यह संकल्प लाना पड़ रहा है। इस सदन की मर्यादा को बचाने और सदन में जनता का विश्वास कायम रखने के लिए धर्म का पालन करते हुए हम यह अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं।’’
गोगोई ने कहा कि विपक्ष बिरला पर व्यक्तिगत रूप से हमला नहीं कर रहा है।
उनका कहना था, ‘‘इस मंदिर (संसद) का दरवाजा सबके लिए खुला हुआ है और इसके संचालन में अध्यक्ष की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए, तब 20 से अधिक बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे।’’
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट सत्र के पहले चरण में अपने भाषण में एक पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करने का प्रयास करते हुए सरकार पर निशाना साधने का प्रयास किया था और आसन से उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई थी।
गोगोई ने इसी परिप्रेक्ष्य में कहा, ‘‘जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देख रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो।’’