Bhojshala is a Temple of Goddess Saraswati and a ‘Seat of Knowledge’; the idol currently housed in London must be brought back: Hindu Side
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में धार के भोजशाला विवाद के मुकदमे में हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने शुक्रवार को दावा किया कि 11वीं सदी का यह स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती मंदिर है और इससे जुड़ी ‘ज्ञान पीठ’ में अलग-अलग विद्याओं का अध्ययन किया जाता था।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मंदिर में स्थापित सरस्वती की मूर्ति फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में है जिसे वापस भारत लाकर भोजशाला में फिर से स्थापित किया जाना चाहिए।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रही है। सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जा रही हैं।
सुनवाई के पांचवें दिन हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं में शामिल कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के सामने अपनी दलीलें पेश कीं।
गुप्ता ने खंडपीठ के सामने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल की याचिका भोजशाला परिसर पर मालिकाना हक के दावे को लेकर दायर नहीं की गई है और इसमें अदालत द्वारा इस परिसर का धार्मिक चरित्र तय करने की गुहार की गई है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इस मंदिर में स्थापित सरस्वती की मूर्ति फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में है जिसे वापस भारत लाकर भोजशाला में फिर से स्थापित किया जाना चाहिए।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रही है। सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जा रही हैं।
सुनवाई के पांचवें दिन हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं में शामिल कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के सामने अपनी दलीलें पेश कीं।
गुप्ता ने खंडपीठ के सामने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल की याचिका भोजशाला परिसर पर मालिकाना हक के दावे को लेकर दायर नहीं की गई है और इसमें अदालत द्वारा इस परिसर का धार्मिक चरित्र तय करने की गुहार की गई है।