बंगाल चुनाव: बागदा, गायघाट में मतुआ प्रथम परिवार में विभाजन गहराया, एआईआर से झटका

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 25-04-2026
Bengal Elections: Rift Deepens within Matua 'First Family' in Bagda and Gaighata; Setback from AIR
Bengal Elections: Rift Deepens within Matua 'First Family' in Bagda and Gaighata; Setback from AIR

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की सीमा से सटे उत्तरी 24 परगना जिले में मतुआ समुदाय के गढ़-- बागदा और गायघाट- में चुनाव भाजपा-तृणमूल कांग्रेस के बीच पारंपरिक मुकाबले से कहीं आगे निकल गया है।

अब यह चुनावी लड़ाई विभाजित मतुआ प्रथम परिवार के बीच चल रही है, जिसमें भाई, पत्नियां और चचेरे भाई-बहन प्रतिद्वंद्वी खेमों से चुनाव लड़ रहे हैं। उधर, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने शरणार्थी हिंदुओं के बीच नयीं चिंताएं पैदा कर दी हैं, जो कभी एक साथ मतदान करते थे।
 
मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान के रहने वाले मतुआ हिंदू हैं, जो विभाजन के दौरान और बांग्लादेश बनने के बाद भारत में आकर बस गए थे।
 
मतुआ महासंघ के मुख्यालय ठाकुरनगर में चाय की दुकानों, दरवाजों और पार्टी कार्यालयों में चिंता साफ दिखाई देती है। परिवार दबी जुबान में कह रहे हैं कि अंतिम मतदाता सूची से कई नाम गायब हो गये एवं कई मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ के दायरे में रखा गया है। उनका यह भी कहना है कि दशकों से रह रहे इन लोगों से अचानक यह साबित करने के लिए कहा जा रहा है कि वे इसी इलाके के निवासी हैं।
 
ठाकुरनगर के ठाकुर परिवार को अक्सर मतुआ समुदाय का ‘प्रथम परिवार’ कहा जाता है क्योंकि यह अपने वंश को संप्रदाय के संस्थापक हरिचंद ठाकुर से जोड़ता है। इसने समुदाय के धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक दिशा को आकार दिया है।
 
इस तनाव के चलते बोंगांव उपमंडल के बागदा और गायघाट ऐसे निर्वाचन क्षेत्र बन गये हैं जिनपर 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव में सबसे अधिक नजर है।