अवंती बाई का अद्वितीय साहस, सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय : योगी आदित्यनाथ

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 20-03-2026
Avanti Bai's unparalleled courage and supreme sacrifice are a golden chapter in Indian history: Yogi Adityanath
Avanti Bai's unparalleled courage and supreme sacrifice are a golden chapter in Indian history: Yogi Adityanath

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शुक्रवार को कहा कि उनका अद्वितीय साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।
 
योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना, राष्ट्र-स्वाभिमान की अमर प्रतीक रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।”
 
मुख्यमंत्री ने कहा, “मातृभूमि की रक्षा हेतु उनका अद्वितीय साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उनका जीवन नारी शक्ति और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक उदाहरण है।”
 
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाली महान वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन।”
 
उन्होंने कहा, “उनके अद्वितीय साहस, निडर संघर्ष और असाधारण बलिदान को देश सदैव याद रखेगा।”
 
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अदम्य साहस एवं शौर्य की प्रतीक, 1857 स्वतंत्रता संग्राम की अमर 'वीरांगना' रानी अवंती बाई लोधी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।”
 
चौधरी ने कहा, “मातृभूमि की रक्षा हेतु उनके अतुलनीय पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान का इतिहास सदैव राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान एवं साहस की प्रेरणा देता रहेगा।”
 
आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों में रानी अवंती बाई लोधी का प्रमुख स्थान है।
 
उनका जन्म 16 अगस्त 1831 को मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के मनकेहनी नामक गांव में हुआ था। उनके पिता राव जुझार सिंह एक जमींदार थे और उन्होंने बचपन में ही तलवारबाजी और घुड़सवारी में महारत हासिल कर ली थी। उन्होंने 20 मार्च 1858 को मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।