Army ignites new enthusiasm among youth on World Youth Skills Day.
शी-योमी (अरुणाचल प्रदेश)
विश्व युवा कौशल दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती मेंचुका क्षेत्र में युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर फिटनेस, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। भारतीय सेना की स्पीयरहेड डिवीजन और स्पीयर कॉर्प्स ने स्थानीय यूथ क्लब ऑफ मेंचुका के सहयोग से मैराथन और प्रेरक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नई कौशल सीखने और भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करना था।
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ डिफेंस) के अनुसार, यह कार्यक्रम भारतीय सेना और स्थानीय समुदाय की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसका लक्ष्य युवाओं को शिक्षा, खेल और कौशल विकास के माध्यम से सशक्त बनाना है।
करीब 200 लोगों ने दौड़ी मैराथन
कार्यक्रम की शुरुआत मैराथन से हुई, जिसमें लगभग 200 लड़कों, लड़कियों, स्थानीय नागरिकों और भारतीय सेना के जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सीमावर्ती इलाके में आयोजित इस आयोजन ने युवाओं के बीच खेल भावना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।
मैराथन के दौरान पूरा मेंचुका क्षेत्र उत्साह और ऊर्जा से भर गया। स्थानीय लोगों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। सेना और नागरिकों की संयुक्त भागीदारी ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।
विशिष्ट अतिथियों ने बढ़ाया प्रतिभागियों का उत्साह
कार्यक्रम में मेंचुका की अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) ताना याहो, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा अरुणाचल प्रदेश के दो प्रसिद्ध खिलाड़ियों ने शिरकत की।
रेस एंबेसडर के रूप में शामिल ज्योति माने, जो राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाली अरुणाचल प्रदेश की पहली एथलीट हैं, और ताजुम डेरे, जो राष्ट्रीय खेल 2025 के लिए क्वालीफाई करने वाले राज्य के पहले साइकिलिस्ट हैं, ने युवाओं को प्रेरित किया।
दोनों खिलाड़ियों ने प्रतिभागियों से कहा कि अनुशासन, निरंतर मेहनत और समर्पण के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी उपलब्धियों ने युवाओं में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई ऊर्जा का संचार किया।
विजेताओं को नकद पुरस्कार
मैराथन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। लड़कों और लड़कियों दोनों वर्गों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमशः 15 हजार रुपये, 10 हजार रुपये और 5 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
आयोजकों का कहना है कि इन पुरस्कारों का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना है।
कौशल विकास पर विशेष संवाद
मैराथन के बाद युवाओं और विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, नवाचार और आजीवन सीखने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों और सेना के अधिकारियों ने युवाओं से अपनी प्रतिभा को पहचानने, व्यावहारिक कौशल विकसित करने और बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप खुद को तैयार करने का आह्वान किया। उन्हें उभरते करियर विकल्पों, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों की भी जानकारी दी गई।
इसके साथ ही प्रतिभागियों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में भी बताया गया, जिनका उद्देश्य युवाओं को रोजगार, कौशल प्रशिक्षण, स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
सेना और समाज के सहयोग की मिसाल
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, यह आयोजन सैन्य-नागरिक समन्वय और सीमा जन कल्याण की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस कार्यक्रम ने भारतीय सेना, स्थानीय प्रशासन, यूथ क्लब और आम नागरिकों को एक साझा मंच पर लाकर सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास की दिशा में सकारात्मक संदेश दिया।
भारतीय सेना का मानना है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को सशक्त बनाना भी राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी सोच के तहत सेना समय-समय पर शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करती रहती है।
'विकसित भारत' के सपने को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को यदि बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मेंचुका में आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक सार्थक पहल माना जा रहा है।
खेल, फिटनेस और कौशल विकास को एक साथ जोड़ने वाले इस आयोजन ने युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आत्मनिर्भर बनने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। भारतीय सेना की यह पहल 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।