भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं कृषि और उससे जुड़े व्यवसाय : बागडे

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 08-08-2026
Agriculture and related businesses are the backbone of the Indian economy: Bagde
Agriculture and related businesses are the backbone of the Indian economy: Bagde

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

 
 राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को कहा कि कृषि और इससे जुड़े व्यवसाय भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं और आज भी देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उदयपुर में ‘एग्रीविजन’ की संगोष्ठी में राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को केवल परंपरागत व्यवसाय के रूप में न देखें, बल्कि आधुनिक प्रौद्योगिकी, नवाचार और उद्यमिता से जोड़कर इसे रोजगार और समृद्धि का सशक्त माध्यम बनाएं।
 
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की कृषि परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। मध्यकालीन भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव कृषि एवं इससे जुड़े व्यवसायों पर टिकी थी। समय के साथ कृषि तकनीकों में भी अनेक नवाचार हुए, जो भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रमाण हैं।’’
 
उन्होंने युवाओं को परंपरागत कृषि आधारित व्यवसायों से जुड़ने और उन्हें आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से नयी ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रेरित किया।
 
उन्होंने कहा कि आज कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नए उद्यम, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। युवा इन अवसरों को पहचानकर कृषि को उद्यमिता से जोड़ सकते हैं।
 
आधिकारिक बयान के अनुसार, दो दिवसीय इस संगोष्ठी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता के विकास में युवाओं की भूमिका को लेकर विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।
 
राज्यपाल ने मेवाड़ की ऐतिहासिक एवं सामरिक महत्ता का उल्लेख करते हुए महाराणा प्रताप के संघर्ष और दूरदर्शिता को याद किया।
 
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने न केवल आत्मगौरव और राष्ट्ररक्षा के लिए संघर्ष किया, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में कृषि और जनजीवन के उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास किए।
 
उनका जीवन युवाओं को कठिन परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और नवाचार के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
 
बागडे ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक समृद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, महर्षि भार्गव, महर्षि पाराशर सहित अनेक ऋषि-मुनियों ने अपने प्रयोगों और अनुसंधानों के माध्यम से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
 
उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा में प्रकृति, कृषि, गणित और खगोल विज्ञान से जुड़े अनेक ऐसे ज्ञान-विषय मौजूद रहे हैं, जिनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
 
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को समझें और आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ उसका समन्वय करते हुए नए प्रयोग करें।