आगरा (उत्तर प्रदेश)
आगरा में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े 3,000 से ज़्यादा घर खरीदारों ने उत्तर प्रदेश सरकार से संपर्क किया है। वे 'सुशांत ताज सिटी टाउनशिप' मामले में सरकार से दखल देने की मांग कर रहे हैं। आरोप है कि यह प्रोजेक्ट करीब दो दशकों से अधूरा पड़ा है। इस प्रोजेक्ट को 'अंसल प्रॉपर्टीज़ एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' ने शुरू किया था। घर खरीदारों के मुताबिक, 2000 के दशक की शुरुआत में इस उम्मीद के साथ प्लॉट बुक किए गए थे कि उन्हें समय पर सौंप दिया जाएगा। लेकिन, उनका आरोप है कि यह प्रोजेक्ट बीच में ही रुक गया। कई खरीदारों का दावा है कि उन्होंने पूरी रकम चुका दी है, फिर भी उन्हें अभी तक कब्ज़ा नहीं मिला है। कई आवंटियों का कहना है कि चल रही EMI और किराए के खर्चों की वजह से उन्हें लगातार आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
घर खरीदारों ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में दखल दे और यह सुनिश्चित करे कि प्रोजेक्ट पूरा हो, या फिर उन्हें उचित मुआवज़ा दिया जाए। आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उसने प्रोजेक्ट की प्रगति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कथित तौर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। घर खरीदारों के संगठन के अध्यक्ष के.जी. अग्रवाल ने बताया कि करीब 3,000 परिवार इस समस्या से प्रभावित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई खरीदारों द्वारा पूरी रकम चुकाने के बावजूद, उन्हें न तो कब्ज़ा मिला है और न ही डेवलपर या अधिकारियों की तरफ से कोई खास जानकारी दी गई है। उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है, जिसमें प्रोजेक्ट को सरकार द्वारा अपने हाथ में लेना या उसे पूरा करवाने में मदद करना शामिल है।
खरीदारों का यह भी आरोप है कि प्रोजेक्ट के प्रबंधन में बार-बार बदलाव, जानकारी की कमी और कोई स्पष्ट समय-सीमा न होने की वजह से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उनका यह भी दावा है कि अंसल ग्रुप के अन्य प्रोजेक्ट्स से जुड़े दिवालियापन (insolvency) मामलों की सुनवाई के दौरान भी इस प्रोजेक्ट का कोई प्रभावी समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। इस मामले की पेचीदगी तब और बढ़ गई है, जब ग्रुप के वित्तीय लेन-देन की जांच अभी भी चल रही है। आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आगरा में अलग-अलग मामलों के सिलसिले में ग्रुप से जुड़ी कुछ संपत्तियों को ज़ब्त कर लिया है, जिससे इस प्रोजेक्ट को लेकर अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है। कई खरीदारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर भी इस मामले में सीधे दखल देने की मांग की है। एक आवंटी ने आरोप लगाया कि पूरी रकम चुकाने के बावजूद, 20 साल बीत जाने के बाद भी उसे अभी तक कब्ज़ा नहीं मिला है।