आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘आक्रोश मार्च’ के दौरान पार्टी सांसद बांसुरी स्वराज को हिरासत में लिए जाने के घटनाक्रम के सिलसिले में आम आदमी पार्टी (आप) और उसके नेताओं-सौरभ भारद्वाज और अंकुश नारंग पर सोशल मीडिया पर कोई भी सामग्री प्रसारित करने पर रोक लगा दी है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर पाल सिंह ने बृहस्पतिवार को बांसुरी की मानहानि याचिका पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश पारित किया।
बांसुरी ने अपनी याचिका में अदालत से अनुरोध किया है कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने की घटना का वीडियो साझा करने पर स्थायी रोक लगाई जाए।
भाजपा सांसद ने वीडियो साझा करने के लिए ‘आप’ और उसके नेताओं को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और उन्हें 10 लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया है।
अदालत ने कहा, “अगर उक्त मानहानिकारक सामग्री को सार्वजनिक मंच पर रहने दिया जाता है, तो वादी (बांसुरी) को अपूरणीय क्षति और हानि होगी। अगर मानहानिकारक सामग्री को सार्वजनिक मंच से हटा दिया जाता है, तो प्रतिवादियों (‘आप’ नेताओं) को कोई नुकसान नहीं होगा।”
अदालत ने ‘आप’ नेताओं को सुनवाई की अगली तारीख तक उक्त सामग्री को अपने सोशल मीडिया हैंडल से तुरंत हटाने का निर्देश दिया। उसने पार्टी नेताओं के ऐसी कोई भी मानहानिकारक सामग्री प्रसारित करने पर भी रोक लगा दी।
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न हो पाने के विरोध में भाजपा की ओर से 18 अप्रैल को आयोजित ‘आक्रोश मार्च’ के दौरान दिल्ली पुलिस ने बांसुरी और केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे को उस समय हिरासत में ले लिया था, जब वे विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आवास की ओर बढ़ रही थीं।
बांसुरी ने आरोप लगाया कि 19 अप्रैल को ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज ने उन्हें हिरासत में लिए जाने का वीडियो “भारतीय ड्रामा कंपनी” कैप्शन के साथ अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया।