आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह सामने आया है कि नियमित एरोबिक व्यायाम करने से दिमाग जैविक रूप से अधिक युवा दिखाई दे सकता है। एमआरआई स्कैन के आधार पर किए गए इस शोध में पाया गया कि जो वयस्क एक साल तक नियमित रूप से व्यायाम करते रहे, उनके दिमाग की उम्र उन लोगों की तुलना में लगभग एक साल कम पाई गई, जिन्होंने अपनी जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं किया।
यह अध्ययन जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस में प्रकाशित हुआ है और इसे एडवेंटहेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अंजाम दिया। शोध का फोकस खास तौर पर मध्य आयु वर्ग पर था, जिसे दिमागी स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद अहम दौर माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी उम्र में की गई रोकथाम भविष्य में लंबे समय तक लाभ पहुंचा सकती है।
शोध में 26 से 58 वर्ष आयु के 130 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया, जिसमें एक समूह ने सप्ताह में करीब 150 मिनट मध्यम से तेज एरोबिक व्यायाम किया, जबकि दूसरे समूह ने अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखी। एक साल बाद दोनों समूहों के एमआरआई स्कैन किए गए और कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस की भी जांच की गई।
नतीजों में सामने आया कि नियमित व्यायाम करने वाले समूह के दिमाग की अनुमानित उम्र औसतन 0.6 साल कम हो गई, जबकि व्यायाम न करने वाले समूह में दिमाग की उम्र में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोनों के बीच लगभग एक साल का स्पष्ट अंतर देखा गया।
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. लू वान के अनुसार, यह बदलाव भले ही छोटा लगे, लेकिन दशकों के नजरिये से इसका प्रभाव काफी अहम हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि व्यायाम से सोचने-समझने की क्षमता, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे और बड़े स्तर के शोध की जरूरत है, ताकि यह समझा जा सके कि यह प्रभाव लंबे समय में किन बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है।