इतिहास अक्सर चुपचाप बनता है, लेकिन 27 जनवरी 2026 को एक ऐसे दिन के रूप में याद किया जाएगा जब भारत ने अपनी आर्थिक दिशा को निर्णायक रूप से बदल दिया। इसी दिन भारत और यूरोपीय संघ ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा एफटीए है, जो 27 यूरोपीय देशों को जोड़ता है और जिसकी कुल कीमत लगभग 213 अरब अमेरिकी डॉलर है।
यह समझौता केवल आयात-निर्यात या शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि और दीर्घकालिक सहयोग की एक व्यापक रूपरेखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सिर्फ व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि भारत, उसके उद्योगों, कुशल कामगारों और यूरोप में रहने वाले लगभग आठ लाख भारतीयों के लिए अवसरों का नया द्वार है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डर लेयेन ने भी इस समझौते को ऐतिहासिक बताया।
यह समझौता भारत के गणतंत्र दिवस के तुरंत बाद घोषित किया गया, जिससे इसका प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ जाता है। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल लेन-देन की कूटनीति नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक साझेदारी पर भरोसा करता है। ऐसे समय में जब वैश्वीकरण पर सवाल उठ रहे हैं और कई देश संरक्षणवादी नीतियाँ अपना रहे हैं, भारत और यूरोप ने सहयोग और खुलेपन का रास्ता चुना है। वर्षों तक अटकी बातचीत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के बाद, यह समझौता बदलते भू-राजनीतिक हालात में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम है।

हाल के वर्षों में वैश्विक व्यापार राजनीति में अस्थिरता बढ़ी है, खासकर अमेरिका द्वारा लगाए गए अचानक टैरिफ़ से भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुँचा। इससे यह साफ हो गया कि किसी एक बाज़ार पर अधिक निर्भर रहना जोखिम भरा है। भारत-ईयू एफटीए इस समस्या का समाधान करता है क्योंकि इसके तहत भारतीय उत्पादों को यूरोप में तरजीही और शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे भारत को एक स्थिर, भरोसेमंद और नियम-आधारित बाज़ार मिलेगा और एकतरफा नीतिगत फैसलों से होने वाले नुकसान का खतरा कम होगा। यह समझौता भारत के व्यापार ढांचे को संतुलित करता है और निर्यातकों को स्थिरता व भरोसे का वातावरण देता है।
Today marks a historic moment as we open a new chapter in EU-India relations - on trade, security, and people-to-people ties.
— António Costa (@eucopresident) January 27, 2026
Our Summit sends a clear message: in a reshaping global order, the EU and India stand together as strategic, reliable partners. https://t.co/Dvn3yggfHn
इस समझौते का सबसे बड़ा असर भारत के श्रम-प्रधान और छोटे उद्योगों पर पड़ेगा। वस्त्र, जूते, चमड़ा, रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद, हस्तशिल्प, मिट्टी के बर्तन और धातु शिल्प जैसे क्षेत्रों को यूरोप के समृद्ध उपभोक्ता बाज़ारों तक बेहतर पहुँच मिलेगी। तिरुपुर के बुनकरों, आगरा के जूता निर्माताओं, मुरादाबाद के पीतल कारीगरों और सूरत के आभूषण उद्योग को नए अवसर मिलेंगे। इससे उत्पादन बढ़ेगा, कीमतों में स्थिरता आएगी और निर्यात में तेजी होगी। ये क्षेत्र श्रम-प्रधान हैं, इसलिए इससे बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और इसका लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक पहुँचेगा।

वस्तुओं के साथ-साथ यह समझौता सेवा क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाएँ, कंसल्टिंग और अन्य ज्ञान-आधारित क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों को यूरोप में काम करने के नए अवसर मिलेंगे। इससे भारत एक लागत-आधारित निर्यातक से आगे बढ़कर मूल्य-आधारित वैश्विक सेवा केंद्र के रूप में उभरेगा। यूरोप में रहने और काम करने वाले लाखों भारतीयों के लिए यह समझौता बेहतर आर्थिक एकीकरण और पेशेवर अवसर लेकर आएगा, जिससे भारत की सॉफ्ट पावर भी मजबूत होगी।
हालाँकि इतना बड़ा समझौता चुनौतियों के बिना नहीं है। यूरोप से आने वाले ऑटोमोबाइल और उन्नत मशीनरी पर शुल्क कम होने से भारतीय उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। साथ ही यूरोप के कड़े मानकों जैसे पर्यावरण संरक्षण, गुणवत्ता, डेटा सुरक्षा और श्रम नियमों का पालन करना होगा। लेकिन यही दबाव भारतीय उद्योगों को आधुनिक बनने, स्वच्छ तकनीक अपनाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा। सरकार और उद्योगों को मिलकर लॉजिस्टिक्स सुधारने, नियमों को सरल बनाने और छोटे व मध्यम उद्यमों को मानकों के अनुरूप ढालने की जरूरत होगी।
यह समझौता केवल भारत और यूरोप के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मजबूत संदेश है। यह दिखाता है कि बड़े और विविध देश भी संतुलित, सम्मानजनक और दीर्घकालिक व्यापार समझौते कर सकते हैं। यह व्यापार को निर्भरता का नहीं, बल्कि मजबूती और लचीलापन बढ़ाने का माध्यम साबित करता है। “मदर ऑफ ऑल डील्स” केवल एक शुरुआत है। इसकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे ज़मीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। अगर भारत इस अवसर का सही उपयोग करता है, तो यह समझौता उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक आत्मविश्वासी, विविध और भरोसेमंद व्यापार शक्ति के रूप में स्थापित कर सकता है।Europe and India are making history today.
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) January 27, 2026
We have concluded the mother of all deals.
We have created a free trade zone of two billion people, with both sides set to benefit.
This is only the beginning.
We will grow our strategic relationship to be even stronger. pic.twitter.com/C7L1kQQEtr




राजीव नारायण